मुख्य तथ्य
केरल के विपक्ष के नेता और माकपा नेता पिनराई विजयन ने केंद्र सरकार द्वारा गठित जनसांख्यिकीय बदलाव समिति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने राजनीतिक प्रेरित कदम बताया है।
विजयन का आरोप
विजयन ने कहा कि यह समिति आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के राजनीतिक भाषणों पर आधारित है और इसे नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का विस्तार माना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र जानबूझकर जनगणना में देरी कर रहा है ताकि इस समिति के माध्यम से संघ परिवार की नफरत की राजनीति को आगे बढ़ाया जा सके।
समिति का उद्देश्य और चिंताएं
गृह मंत्रालय ने यह समिति अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए गठित की है। हालांकि, विजयन का कहना है कि यह कदम सीमावर्ती जिलों और महानगरों को लक्षित करके लोगों में भय और विभाजन पैदा करने के लिए है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन के बहाने नागरिकता सत्यापन का प्रयास किया था।
केरल सरकार से अपील
विजयन ने याद दिलाया कि पिछली LDF सरकार ने आश्वासन दिया था कि केरल में जनगणना के हिस्से के रूप में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने वर्तमान UDF सरकार से ऐसे प्रयासों के खिलाफ सतर्क रहने का आग्रह किया।
FAQ
जनसांख्यिकीय बदलाव समिति क्या है?
यह गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति है जो अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करेगी।
पिनराई विजयन ने इस समिति पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि यह समिति राजनीतिक प्रेरित है और जनगणना प्रक्रिया को कमजोर करने तथा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण फैलाने के लिए बनाई गई है।
समिति के गठन का विरोध क्यों हो रहा है?
अल्पसंख्यक समुदायों को डर है कि यह समिति CAA और NRC की तर्ज पर काम करेगी और उनके खिलाफ भेदभावपूर्ण कदम उठाएगी।