प्रमुख तथ्य
फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने भारत सरकार और मानवीय संगठनों से तत्काल चिकित्सा सहायता की अपील की है। राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शवेश ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि फिलिस्तीनी स्वास्थ्य क्षेत्र 'पतन की स्थिति' में है और उसे तत्काल अंतरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता है।
विस्तार से
राजदूत ने भारत की 'आरोग्य मैत्री' परियोजना का हवाला देते हुए कहा कि इसे फिलिस्तीनी स्वास्थ्य क्षेत्र तक बढ़ाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित इस परियोजना के तहत विकासशील देशों को प्राकृतिक आपदा या मानवीय संकट में चिकित्सा आपूर्ति प्रदान की जाती है।
अबू शवेश ने कहा, 'यह हजारों निर्दोष जीवन बचाने का सही समय है। अगर भारत और भारतीय लोग नहीं, तो कौन? अगर अब नहीं, तो कब?' उन्होंने बताया कि फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय को 520 आवश्यक दवाओं की जरूरत है, जिनमें से 180 पूरी तरह से अनुपलब्ध हैं। कैंसर और ट्यूमर के इलाज के लिए 97 दवाओं में से 50 का स्टॉक शून्य है, जिससे लगभग 4,000 कैंसर रोगी तत्काल जोखिम में हैं।
अस्पतालों में एनेस्थेटिक दवाओं, सर्जिकल सिवनी, डायलिसिस फिल्टर, रक्त इकाइयों, सर्जिकल उपकरण, इंसुलिन और जनरेटर के लिए ईंधन की भी कमी है। गाजा में इजरायली सैन्य अभियान ने सैकड़ों हजारों इमारतों को नष्ट कर दिया है, और मलबे में अनगिनत शव दबे हैं। वेस्ट बैंक में 2026 की शुरुआत से 11,000 से अधिक निर्धारित सर्जरी स्थगित कर दी गई हैं।
प्रभाव
यह संकट फिलिस्तीनी स्वास्थ्य प्रणाली के पतन का संकेत है। भारत से मिलने वाली सहायता हजारों जीवन बचा सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने में मदद कर सकती है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह स्थिति मानवीय संकट की गंभीरता को दर्शाती है। भारत की प्रतिक्रिया वैश्विक मानवीय सहायता में उसकी भूमिका को मजबूत करेगी।
FAQ
फिलिस्तीन ने भारत से कितनी चिकित्सा सहायता मांगी है?
फिलिस्तीनी राजदूत ने 100 मिलियन डॉलर की चिकित्सा सहायता की अपील की है।
आरोग्य मैत्री परियोजना क्या है?
यह भारत सरकार की एक परियोजना है जो प्राकृतिक आपदा या मानवीय संकट से प्रभावित विकासशील देशों को आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति प्रदान करती है।
फिलिस्तीन में कितने कैंसर रोगी जोखिम में हैं?
लगभग 4,000 कैंसर रोगी दवाओं की कमी के कारण तत्काल जोखिम में हैं।