प्रमुख तथ्य
एक राष्ट्र, एक चुनाव (One Nation, One Election) पर गठित संसदीय समिति ने दावा किया है कि यह सुधार 2029 के आम चुनाव तक पूरी तरह लागू हो सकता है। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने शुक्रवार को गोवा में पैनल की दो दिवसीय बैठक के दौरान यह जानकारी दी।
विस्तार से
समिति ने गोवा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार-विमर्श शुरू किया। इस दौरान मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों से बातचीत की गई, जिसमें एक साथ चुनाव कराने की चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा हुई।
आर्थिक प्रभाव
पी.पी. चौधरी ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति को प्रस्तुत एक आर्थिक अध्ययन के अनुसार, अलग-अलग चुनाव कराने से देश को लगभग 7 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। इस नुकसान को रोकने के लिए एक साथ चुनाव कराना जरूरी है।
हितधारकों का समर्थन
चौधरी ने दावा किया कि अब तक परामर्श किए गए लगभग 99% नागरिक समाज हितधारकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह सुधार न केवल आर्थिक बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी लाभदायक होगा।
FAQ
एक राष्ट्र, एक चुनाव क्या है?
यह एक प्रस्ताव है जिसके तहत लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे, जिससे बार-बार चुनावों से होने वाले खर्च और प्रशासनिक व्यवधान को कम किया जा सके।
यह सुधार कब तक लागू हो सकता है?
संसदीय समिति के अनुसार, 2029 के आम चुनाव तक इसे पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य है।
इससे कितना आर्थिक नुकसान बचेगा?
कोविंद समिति के अध्ययन के अनुसार, अलग-अलग चुनावों से देश को लगभग 7 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है, जो एक साथ चुनाव कराने से बच सकता है।