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Mysuru में बाइलिंगुअल स्कूलों की परीक्षा प्रणाली पर विवाद: AIDSO ने कन्नड़ में जवाब लिखने वाले छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया

मुख्य तथ्य मैसूर जिला समिति के अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (AIDSO) ने राज्य सरकार की बाइलिंगुअल मीडियम स्कूलों की ब्रिज कोर्स परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली की कड़ी आलोचना की है। संगठन का आरोप है…

मुख्य तथ्य

मैसूर जिला समिति के अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (AIDSO) ने राज्य सरकार की बाइलिंगुअल मीडियम स्कूलों की ब्रिज कोर्स परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली की कड़ी आलोचना की है। संगठन का आरोप है कि यह प्रणाली उन छात्रों के साथ भेदभाव करती है जो अपने उत्तर कन्नड़ में लिखना चुनते हैं।

विस्तार से जानकारी

AIDSO के जिला सचिव निथिन ने मंगलवार को जारी एक बयान में दावा किया कि इस शैक्षणिक वर्ष में शुरू की गई मूल्यांकन प्रणाली के तहत, बाइलिंगुअल सरकारी स्कूलों में छात्रों को केवल तभी 'A ग्रेड' दिया जाता है जब वे अंग्रेजी में उत्तर लिखते हैं। वहीं, कन्नड़ में उत्तर लिखने वाले छात्रों को उनके उत्तरों की गुणवत्ता की परवाह किए बिना केवल 'B ग्रेड' तक ही सीमित रखा जाता है।

प्रभाव और प्रतिक्रिया

संगठन ने सवाल उठाया कि बाइलिंगुअल मीडियम प्रणाली को किस तरह से लागू किया गया। AIDSO का कहना है कि यह नीति छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों से उचित परामर्श के बिना लागू की गई। संगठन ने जोर देकर कहा कि मातृभाषा में शिक्षा सीखने की एक महत्वपूर्ण नींव है और सरकार ने भाषा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की राय को नजरअंदाज किया है जो मातृभाषा में शिक्षा को मजबूत करने के पक्ष में हैं।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • AIDSO ने सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
  • संगठन ने इस मूल्यांकन प्रणाली को 'अशैक्षिक, अवैज्ञानिक और अलोकतांत्रिक' बताते हुए इसे वापस लेने का आग्रह किया है।
  • उनका कहना है कि छात्रों को कन्नड़ को सीखने के माध्यम के रूप में चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

FAQ

AIDSO ने मैसूर की शिक्षा प्रणाली पर क्या आरोप लगाया है?

AIDSO ने आरोप लगाया है कि बाइलिंगुअल स्कूलों में मूल्यांकन प्रणाली कन्नड़ में उत्तर लिखने वाले छात्रों के साथ भेदभाव करती है, उन्हें अंग्रेजी में लिखने वालों की तुलना में कम ग्रेड देती है।

AIDSO के अनुसार इस प्रणाली में क्या खामी है?

AIDSO का कहना है कि इस प्रणाली में छात्रों को अंग्रेजी में उत्तर लिखने पर 'A ग्रेड' मिलता है, जबकि कन्नड़ में लिखने पर गुणवत्ता के बावजूद 'B ग्रेड' से आगे नहीं बढ़ाया जाता।

AIDSO ने सरकार से क्या मांग की है?

AIDSO ने मांग की है कि इस 'अशैक्षिक, अवैज्ञानिक और अलोकतांत्रिक' मूल्यांकन प्रणाली को वापस लिया जाए और छात्रों को कन्नड़ में सीखने और उत्तर देने की स्वतंत्रता दी जाए।

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