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देश में मानसून की बारिश 35% कम, एल नीनो का खतरा बरकरार

मानसून की धीमी रफ्तार से बढ़ी चिंता भारत में इस वर्ष मानसून की शुरुआत देरी से हुई है और जून के मध्य तक देश में औसत बारिश सामान्य से 35% कम रही है। भारत मौसम…

मानसून की धीमी रफ्तार से बढ़ी चिंता

भारत में इस वर्ष मानसून की शुरुआत देरी से हुई है और जून के मध्य तक देश में औसत बारिश सामान्य से 35% कम रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 16 जून तक देश का मानसून घाटा 35% पर पहुंच गया है। सबसे अधिक कमी मध्य भारत (63%), पूर्व और पूर्वोत्तर भारत (43%) और दक्षिणी प्रायद्वीप (14%) में दर्ज की गई है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 5% अधिक बारिश हुई है।

एल नीनो का खतरा और मानसून पर प्रभाव

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जून में बारिश की कमी असामान्य नहीं है, लेकिन इस वर्ष एल नीनो की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने 11 जून को एल नीनो की पुष्टि की है और इसके सर्दियों तक बहुत मजबूत होने की 63% संभावना जताई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने पहले ही जून-अगस्त के बीच एल नीनो के उभरने की 80% संभावना व्यक्त की थी।

IMD के मुख्य पूर्वानुमानकर्ता डी.एस. पई ने बताया कि जून की बारिश और मानसून की गति मुख्य रूप से स्थानीय और क्षेत्रीय कारकों पर निर्भर करती है। इस वर्ष मानसून ने केरल में 4 जून को सामान्य तिथि से तीन दिन देरी से दस्तक दी, लेकिन पश्चिमी तट पर इसकी प्रगति रुक गई। मुंबई के उत्तर में एंटीसाइक्लोनिक परिसंचरण और मध्य-अक्षांशीय मौसम प्रणालियों के कारण मानसून आगे नहीं बढ़ पाया है।

सरकार की तैयारी और किसानों के लिए सलाह

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 जून को खरीफ फसलों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि वे कम बारिश वाले जिलों की पहचान करें और फसल-वार आकस्मिक योजनाएं बनाएं ताकि प्रभावित किसानों को तुरंत विकल्प, सलाह और सहायता प्रदान की जा सके।

केंद्र सरकार ने 150 से 200 जिलों को प्राथमिकता से निगरानी में रखा है और साप्ताहिक एल नीनो समीक्षा का आदेश दिया है। किसानों को कपास और दालों की ओर रुख करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि बीज और उर्वरक का स्टॉक पर्याप्त है और जलाशयों में पानी का स्तर पिछले एल नीनो वर्षों की तुलना में बेहतर है।

अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि कृषि क्षेत्र में गंभीर व्यवधान से खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति में लगभग 0.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि हो सकती है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक जोखिम के रूप में चिह्नित किया है। एल नीनो की स्थिति में उर्वरक आपूर्ति पर भी दबाव पड़ सकता है, क्योंकि चीन ने डाय-अमोनियम फॉस्फेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों से घरेलू यूरिया उत्पादन की लागत बढ़ गई है।

मानसून की धीमी प्रगति के कारण

डॉ. पई ने बताया कि मानसून की धीमी गति का एक कारण मानसून और मध्य-अक्षांशीय मौसम प्रणालियों के बीच संघर्ष है। जून में मानसून कमजोर होने के कारण वह मध्य-अक्षांशीय प्रणालियों को पीछे नहीं धकेल पा रहा है, जिससे उसकी प्रगति रुक गई है। एक मजबूत मानसून पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलकर अधिक बारिश ला सकता है, लेकिन कमजोर मानसून को पीछे धकेल दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • जून 2024 में मानसून की बारिश कितनी कम रही? देश में जून 2024 में मानसून की बारिश सामान्य से 35% कम रही।
  • एल नीनो का मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है? एल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ता है और बारिश में कमी आती है, खासकर मध्य और उत्तर भारत में।
  • सरकार ने मानसून की कमी से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं? केंद्र सरकार ने 150-200 जिलों की प्राथमिकता से निगरानी शुरू की है और किसानों को वैकल्पिक फसलों की सलाह दी है।

स्रोत: www.thehindu.com

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