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मानसिक रूप से बीमार महिलाओं के लिए मंगाव: एक आत्मनिर्भर पुनर्वास गाँव

परिचय महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिले में एक अनोखा पुनर्वास गाँव, मंगाव, बेसहारा मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार महिलाओं को आजीवन देखभाल और सम्मानजनक जीवन प्रदान कर रहा है। इस गाँव की…

परिचय

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिले में एक अनोखा पुनर्वास गाँव, मंगाव, बेसहारा मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार महिलाओं को आजीवन देखभाल और सम्मानजनक जीवन प्रदान कर रहा है। इस गाँव की स्थापना डॉ. राजेंद्र बाजीराव धामणे और उनकी पत्नी डॉ. सुचेता धामणे ने अपनी गैर-सरकारी संस्था मौली सेवा प्रतिष्ठान (MSP) के तहत की है।

मंगाव: एक आत्मनिर्भर समुदाय

मंगाव में वर्तमान में 477 महिलाएं और 43 बच्चे रहते हैं। ये महिलाएं सड़कों, रेलवे स्टेशनों, बाजारों और अस्पतालों से बचाई गई हैं। डॉ. राजेंद्र के अनुसार, "अधिकांश महिलाएं सड़कों, सार्वजनिक स्थानों या अस्पताल के वार्डों से बचाई गईं। कई बच्चे राजमार्गों पर मानसिक रूप से बीमार महिलाओं के बलात्कार और शोषण के परिणामस्वरूप पैदा हुए।"

पुनर्वास और कौशल विकास

मंगाव में महिलाओं को उनकी क्षमता के अनुसार डेयरी, गौशाला प्रबंधन, कृषि, चारा उत्पादन, सिलाई और दैनिक सामुदायिक सेवाओं में शामिल किया जाता है। सबसे हालिया पहल बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण इकाई है, जहां 30 महिलाएं आठ प्रकार की कुकीज़, केक और पेस्ट्री बनाती हैं। डॉ. सुचेता कहती हैं, "उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से व्यस्त रखने की आवश्यकता है, और ऐसी पहल मनोचिकित्सा के रूप में भी काम करती हैं।"

आगामी कैफेटेरिया और डेयरी परियोजना

जुलाई 2025 में, अहिल्यानगर-शिर्डी राजमार्ग पर एक कैफेटेरिया खुलेगा, जहां बेकरी उत्पादों के साथ-साथ दूध, पेड़ा, लस्सी और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद बेचे जाएंगे। यह पूरी व्यवस्था सौर ऊर्जा और गोबर गैस से संचालित है।

चुनौतियाँ और भविष्य की योजनाएँ

डॉ. राजेंद्र बताते हैं कि अधिकांश महिलाएं बिना पहचान पत्र, चिकित्सा इतिहास या परिवार के संपर्क के आती हैं। परिवार खोजने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन अक्सर परिवार उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं। मंगाव में मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार विधिपूर्वक किया जाता है और नेत्रदान किया जाता है।

भविष्य में, MSP 300 बिस्तरों वाला एक चैरिटी अस्पताल और अनुसंधान केंद्र स्थापित कर रहा है, जो मानसिक स्वास्थ्य, तंत्रिका विज्ञान और हृदय रोग पर केंद्रित होगा।

FAQ

मंगाव गाँव की स्थापना किसने की?

डॉ. राजेंद्र बाजीराव धामणे और उनकी पत्नी डॉ. सुचेता धामणे ने अपनी संस्था मौली सेवा प्रतिष्ठान के तहत मंगाव की स्थापना की।

मंगाव में कितनी महिलाएं और बच्चे रहते हैं?

वर्तमान में 477 महिलाएं और 43 बच्चे मंगाव में रहते हैं।

मंगाव में महिलाओं को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता है?

महिलाओं को बेकरी, डेयरी प्रबंधन, कृषि, सिलाई और अन्य कौशलों में प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

क्या मंगाव के उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं?

हाँ, मंगाव में बनी कुकीज़ और अन्य उत्पाद स्थानीय दुकानों में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं और त्योहारी व कॉर्पोरेट ऑर्डर भी लिए जाते हैं।

स्रोत: www.thehindu.com

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