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अफसरशाही की मनमानी से बदहाल मंडी के किसान, किसान यूनियन ने सरकार को दी चेतावनी

किसान यूनियन का अधिवेशन और मुख्य मुद्दे हिमाचल किसान यूनियन जिला मंडी का अधिवेशन शनिवार को जिला प्रधान कर्मू राम की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में मंडी के कृषि क्षेत्र में गहराते संकट…

किसान यूनियन का अधिवेशन और मुख्य मुद्दे

हिमाचल किसान यूनियन जिला मंडी का अधिवेशन शनिवार को जिला प्रधान कर्मू राम की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में मंडी के कृषि क्षेत्र में गहराते संकट पर गंभीर चर्चा की गई। कर्मू राम ने कहा कि पदभार संभालने के बाद जब उन्होंने जमीनी स्थिति देखी, तो किसानों की दशा अत्यंत दयनीय पाई। उन्होंने बताया कि किसानों को संकट से उबारने के लिए सरकार को 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया था, जिसे सरकार ने जायज मानकर विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अफसरशाही की उदासीनता के कारण जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ।

अफसरशाही पर तीखा हमला

कर्मू राम ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बयान का हवाला देते हुए कहा कि देश में 70 करोड़ किसान कृषि छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हैं। इसका मुख्य कारण अधिकारियों का अड़ियल रवैया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि विभाग की मनमानी के चलते लाखों करोड़ रुपये का बजट दूरदराज के जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने कहा, 'अधिकारियों को अपनी कुर्सियां छोड़कर मैदान में उतरना होगा।'

प्रमुख मांगें

  • जंगली जानवरों के आतंक से फसलों को बचाने के लिए बजट का निर्धारण
  • मंडी में किसान भवन का निर्माण
  • कृषि भूमि को बचाने के लिए ठोस उपाय
  • दूध खरीद नीति में सुधार

दूध खरीद नीति पर सवाल

किसान यूनियन ने सरकार की दूध खरीद नीति पर भी सवाल उठाए। कर्मू राम ने कहा कि सरकार केवल 20 लीटर दूध खरीदती है और तीन महीने तक भुगतान रोक देती है, जो किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि यह नीति किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है।

आंदोलन की चेतावनी

किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे आंकड़ों के साथ अफसरशाही को बेनकाब करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल देंगे। यूनियन जल्द ही अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने की योजना बना रही है।

FAQ

मंडी में किसानों की मुख्य समस्या क्या है?

किसानों को अफसरशाही की मनमानी, सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना, दूध खरीद नीति में अनियमितता और जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

किसान यूनियन ने सरकार को क्या चेतावनी दी है?

यूनियन ने कहा है कि यदि उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंकड़ों के साथ अफसरशाही को बेनकाब करते हुए सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे।

16 सूत्रीय मांग पत्र में क्या शामिल है?

मांग पत्र में जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा के लिए बजट, मंडी में किसान भवन निर्माण, कृषि भूमि संरक्षण और दूध खरीद नीति में सुधार जैसी मांगें शामिल हैं।

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