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मद्रास हाईकोर्ट: ai कभी भी योग्य व्याख्याता की जगह नहीं ले सकता, कक्षाओं में उपस्थिति अनिवार्य

मद्रास हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कोई भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल, जैसे ChatGPT, कभी भी एक योग्य व्याख्याता की जगह नहीं ले सकता। कोर्ट ने…

मद्रास हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कोई भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल, जैसे ChatGPT, कभी भी एक योग्य व्याख्याता की जगह नहीं ले सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि AI मानव बुद्धि के करीब आ सकता है, लेकिन वह नैतिकता और अखंडता जैसे गुण नहीं सिखा सकता, जो कानूनी पेशे के लिए आवश्यक हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह फैसला न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें तीन सरकारी लॉ कॉलेज के छात्रों को 65% अनिवार्य उपस्थिति पूरी न करने के बावजूद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। एकल न्यायाधीश ने छात्रों को गर्मी की छुट्टियों में विशेष कक्षाओं में भाग लेने के बाद परीक्षा देने की अनुमति दी थी।

कोर्ट की टिप्पणियां

खंडपीठ ने कहा कि जो छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में आते हैं और कानूनी रूप से अनिवार्य उपस्थिति पूरी करते हैं, उनके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, "अत्यधिक प्रतिस्पर्धी शैक्षिक परिदृश्य में, छात्र कड़ी मेहनत के बाद ही अपनी पसंद के कॉलेज में सीट पाते हैं। कई वंचित पृष्ठभूमि के छात्र वैकल्पिक पाठ्यक्रमों पर निर्भर होते हैं। इसलिए छात्रों को अपनी सीटों का मूल्य समझना चाहिए।"

कानूनी शिक्षा का महत्व

पीठ ने कहा कि कानूनी शिक्षा केवल पैसा कमाने के लिए नहीं है, बल्कि समाज और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। "कानून एक मूल्यवान शैक्षिक धारा है जो छात्रों को समाज में प्रचलित कानूनी और मानवाधिकारों से जोड़ती है, जिससे उन्हें आवाजहीनों की आवाज बनने का अवसर मिलता है।"

कक्षा में बहस और चर्चा का महत्व

कोर्ट ने कहा कि कक्षा में बहस और गतिशील सामाजिक चर्चाओं से ही कानूनी विचार और नवीनता उत्पन्न होती है। "कक्षाएं छात्रों को बहस और उत्पादक चर्चाओं में शामिल होने का मंच प्रदान करती हैं, जिससे ऊर्जावान और जीवंत कानूनी पेशेवरों की एक पीढ़ी तैयार होती है।"

ऑनलाइन बनाम भौतिक कक्षाएं

पीठ ने यह भी कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं केवल आवश्यकता पड़ने पर ही सीखने का विकल्प प्रदान कर सकती हैं, लेकिन वे भौतिक कक्षाओं का स्थायी विकल्प नहीं हो सकतीं। "नियमित कक्षाओं में भाग लेने से आत्म-अनुशासन, समय की पाबंदी, सक्रिय कक्षा जुड़ाव और सकारात्मक सामाजिक व्यवहार जैसे मूल्य सीखने को मिलते हैं। इसलिए ऑनलाइन कक्षाओं को भौतिक कक्षाओं का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।"

FAQ

मद्रास हाईकोर्ट ने AI और व्याख्याता के बारे में क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि ChatGPT जैसा AI कभी भी योग्य व्याख्याता की जगह नहीं ले सकता, क्योंकि AI नैतिकता और अखंडता जैसे मूल्य नहीं सिखा सकता।

कोर्ट ने उपस्थिति को क्यों जरूरी बताया?

कोर्ट ने कहा कि नियमित कक्षाएं आत्म-अनुशासन, समय की पाबंदी और सक्रिय भागीदारी जैसे मूल्य सिखाती हैं, जो ऑनलाइन कक्षाओं से संभव नहीं।

इस फैसले का क्या प्रभाव होगा?

इससे कानून के छात्रों को अपनी सीटों की अहमियत समझने और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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