मुख्य तथ्य
कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जुलाई में होने वाले एक हिंदुत्व सम्मेलन में कनेरी मठ के प्रमुख श्री अद्रुश्य कडसिद्धेश्वर स्वामी के शामिल होने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई लिंगायत संगठनों ने उनके प्रवेश का विरोध किया है और चेतावनी दी है कि अगर उन्हें बोलने की अनुमति दी गई तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।
विरोध के पीछे के कारण
राष्ट्रीय बसव सेना के अध्यक्ष रविकुमार बिरादर ने कहा कि स्थानीय समूह 'बसवादी शरण सम्मेलन आयोजन समिति' ने स्वामी को आमंत्रित किया है, जिसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी ने लिंगायत संतों का अपमान किया है और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी। बिरादर ने कहा, "कर्नाटक सरकार को उन हिंदू सम्मेलनों की अनुमति नहीं देनी चाहिए जो बसवन्ना और अन्य शरण संतों के सिद्धांतों के खिलाफ हैं, लेकिन उनके नाम का इस्तेमाल करते हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी ने सार्वजनिक माफी मांगने से इनकार कर दिया है और कई जिला प्रशासनों ने उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। बिरादर ने मांग की कि ये प्रतिबंध स्थायी होने चाहिए और जब तक वे बिना शर्त माफी नहीं मांगते, उन्हें कर्नाटक में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए।
लिंगायत समुदाय की भावनाएं
जागतिक लिंगायत महासभा के जिला अध्यक्ष बसवनगौड़ा हरनाल ने भी स्वामी के दौरे का विरोध किया। उन्होंने कहा, "बसवन्ना एक महान समाज सुधारक थे जिन्होंने जाति, रंग और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उनके सिद्धांतों को किसी एक धर्म या राजनीतिक विचारधारा तक सीमित करना सही नहीं है। हिंदुत्व रैलियों को बसवन्ना के नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति देना लिंगायत समुदाय की भावनाओं को आहत कर सकता है।"
आगे की राह
फिलहाल, विरोध प्रदर्शन की चेतावनी के बीच प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। लिंगायत संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह स्वामी के प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगाए और बसवन्ना के नाम का दुरुपयोग रोके।
FAQ
कनेरी मठ के प्रमुख पर क्या आरोप हैं?
उन पर लिंगायत संतों का अपमान करने और बसवन्ना के सिद्धांतों के खिलाफ बयान देने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी।
विरोध करने वाले संगठन कौन से हैं?
राष्ट्रीय बसव सेना और जागतिक लिंगायत महासभा सहित कई लिंगायत संगठन विरोध कर रहे हैं।
विरोध का कारण क्या है?
संगठनों का कहना है कि स्वामी हिंदुत्व विचारधारा फैलाने के लिए बसवन्ना के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो लिंगायत समुदाय की भावनाओं को आहत करता है।
स्रोत: www.thehindu.com