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लद्दाख वार्ता: केंद्र ने मिनट्स में शामिल किया निर्वाचित निकाय को नियंत्रण और पर्यवेक्षण का अधिकार

मुख्य तथ्य गृह मंत्रालय (MHA) ने लद्दाख के नेताओं के साथ 22 मई को हुई बैठक के मिनट्स में संशोधन किया है, जिसमें प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय निर्वाचित निकाय को सिविल सेवकों पर नियंत्रण…

मुख्य तथ्य

गृह मंत्रालय (MHA) ने लद्दाख के नेताओं के साथ 22 मई को हुई बैठक के मिनट्स में संशोधन किया है, जिसमें प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय निर्वाचित निकाय को सिविल सेवकों पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण का अधिकार दिया गया है। यह संशोधित मिनट्स 28 जून को लेह में हुई अनुवर्ती बैठक में स्वीकार किए गए।

विवरण

MHA द्वारा जारी संशोधित मिनट्स में स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचित निकाय के अधीन विषयों के सिविल सेवकों का नियंत्रण और पर्यवेक्षण, जिसमें वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) शामिल है, निर्वाचित कार्यकारी निकाय द्वारा किया जाएगा। यह लद्दाख के शीर्ष निकाय (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की प्रमुख मांगों में से एक थी।

इससे पहले, MHA द्वारा प्रसारित मसौदा मिनट्स पर लद्दाख के नेताओं ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद 23 जून को लद्दाख में पूर्ण बंदी हुई थी। नेताओं ने आरोप लगाया था कि मसौदा मिनट्स में वार्ता के दौरान हुए समझौतों को शामिल नहीं किया गया।

प्रभाव

संशोधित मिनट्स के स्वीकार होने से केंद्र और लद्दाख के नागरिक समाज समूहों के बीच वार्ता प्रक्रिया पुनर्जीवित होने की उम्मीद है। इससे पहले, मिनट्स को लेकर गतिरोध के कारण वार्ता अनिश्चितता में थी।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • लद्दाख के नेताओं ने राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा, पृथक लद्दाख प्रशासनिक और पुलिस सेवा, और 24 सितंबर 2025 के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई।
  • मिनट्स में कहा गया है कि राज्य का दर्जा लद्दाख की दीर्घकालिक आकांक्षा है, लेकिन पहले कदम के रूप में एक अनुकूलित स्वशासन मॉडल बनाया जाएगा जिसमें कार्यकारी, वित्तीय और विधायी शक्तियां होंगी।
  • अनुच्छेद 371 के तहत लद्दाख के लिए एक अनुकूलित संवैधानिक सुरक्षा मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न प्रावधानों से 'सुई जेनेरिस' मॉडल तैयार किया जाएगा।

FAQ

लद्दाख वार्ता के मिनट्स में क्या बदलाव किया गया?

MHA ने संशोधित मिनट्स में यह प्रावधान जोड़ा कि प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय निर्वाचित निकाय अपने अधीन विषयों के सिविल सेवकों पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण करेगा, जिसमें APAR भी शामिल है।

लद्दाख के नेताओं ने पहले मिनट्स पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?

उन्होंने आरोप लगाया कि मसौदा मिनट्स में वार्ता के दौरान हुए महत्वपूर्ण समझौतों को शामिल नहीं किया गया, जिससे केंद्र अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट रहा है।

लद्दाख के लिए क्या दीर्घकालिक मांग है?

लद्दाख के नेताओं ने राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग की है, जिसे दीर्घकालिक आकांक्षा बताया गया है।

स्रोत: indianexpress.com

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