मुख्य तथ्य
कुल्लू जिले की सैंज घाटी में सेब सीजन शुरू होने में कुछ ही समय बचा है, लेकिन दर्जनों सड़कों की खराब हालत बागवानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। वर्ष 2025 की आपदा में हुए भारी नुकसान के बाद इस बार भी उसी स्थिति की आशंका से किसान और बागवान परेशान हैं।
सड़कों की वर्तमान स्थिति
सैंज घाटी की प्रमुख सड़कें जैसे रैला देउरी, दुशाहड़, शांघड़, शैंशर, घाट, परगाणु और फगला की हालत बेहद खराब है। मामूली बारिश होते ही ये मार्ग भूस्खलन और दलदल की चपेट में आ जाते हैं, जिससे आवाजाही ठप हो जाती है। पार्वती परियोजना के डैम साइट के पास लगातार हो रहे भूस्खलन से भी छह पंचायतों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बागवानों की चिंता
बागवान गेहर सिंह, हरि सिंह, नंद राम और प्रीतम सिंह ने बताया कि 2025 में किसानों और बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने कहा, "अगर सड़कों को नहीं सुधारा गया तो उन्हें इस बार भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।"
2025 की आपदा का असर
वर्ष 2025 में सिउंड-रैला सड़क चार महीने तक बंद रही थी। इसके चलते पूरा सेब बगीचों में ही सड़ गया। स्थानीय निवासी लिखत राम नेगी ने कहा, "2025 में सिउंड-रैला सड़क चार महीने बंद हो गई थी। इसके चलते सारा सेब बगीचे में ही सड़ गया था। हमें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी इसका डर सता रहा है।"
प्रशासन से मांग
बनोगी निवासी कमल ठाकुर ने कहा, "पिछली आपदा में घाटी के सभी मार्ग बंद हो गए थे। इस कारण किसानों और बागवानों को नुकसान हुआ था। इस वर्ष इस तरह का नुकसान न हो, विभाग को समय रहते कदम उठाना चाहिए।" बागवानों का कहना है कि विभाग और प्रशासन को जल्द सड़कों की हालत सुधारनी चाहिए ताकि सेब और अन्य फसलों को मंडियों तक पहुंचाया जा सके।
क्या कहते हैं आंकड़े?
सैंज घाटी में कुल 16 पंचायतें हैं, और इन सभी पंचायत क्षेत्रों की सड़कों की दशा ठीक नहीं है। किसान-बागवान अपने फल और सब्जी उत्पाद को टकोली, भुंतर और बंदरोल सब्जी मंडियों में ले जाते हैं। सड़कों की खराब स्थिति के कारण यह आवाजाही मुश्किल हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सैंज घाटी में कितनी पंचायतें हैं?
सैंज घाटी में कुल 16 पंचायतें हैं।
2025 में किस सड़क के बंद होने से सेब की फसल खराब हुई?
2025 में सिउंड-रैला सड़क चार महीने बंद रही, जिससे सेब की फसल बर्बाद हो गई।
बागवान अपनी फसल कहां ले जाते हैं?
बागवान फल और सब्जी टकोली, भुंतर और बंदरोल की मंडियों में ले जाते हैं।