मुख्य तथ्य
कुल्लू जिले के बाह्य सराज क्षेत्र में देवता शरशाही नाग के नए मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। ग्राम पंचायत गमोग में बन रहे इस मंदिर की दो मंजिलें पूरी हो चुकी हैं और तीसरी मंजिल का निर्माण शुरू हो गया है।
निर्माण विवरण
देवविधि के अनुसार 29 अप्रैल 2026 को शुरू हुए इस निर्माण कार्य में काष्ठकुणी शैली अपनाई गई है। यह पारंपरिक हिमाचली शैली मंदिर को भव्य और टिकाऊ बनाती है। मंदिर का निर्माण देवता के दोनों गढ़ों के लोगों के सहयोग से किया जा रहा है।
सामुदायिक सहभागिता
मंदिर निर्माण में देवता के कारकून, हरियान और देवलू तन, मन और धन से योगदान दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सभी के सहयोग से मंदिर निर्धारित समय में पूरा हो जाएगा। कारदारों में बसंत पाल, गोपाल चंद, जय पाल, लाल चंद, रघुवीर सिंह, नरोतम ठाकुर, शिव राम, तारा चंद, कर्म दास, बालक राम और कुंदन लाल शामिल हैं।
लक्ष्य और समयसीमा
देवता के आदेशानुसार इस मंदिर का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है, जिससे कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- देवता शरशाही नाग का मंदिर कहाँ बन रहा है? यह मंदिर कुल्लू जिले के बाह्य सराज क्षेत्र की ग्राम पंचायत गमोग में बन रहा है।
- मंदिर निर्माण कब शुरू हुआ और कितनी मंजिलें पूरी हो चुकी हैं? निर्माण कार्य 29 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था। अब तक दो मंजिलें पूरी हो चुकी हैं और तीसरी मंजिल का काम शुरू हो गया है।
- मंदिर किस शैली में बन रहा है? मंदिर काष्ठकुणी शैली में बनाया जा रहा है, जो हिमाचल की पारंपरिक वास्तुकला है।