प्रमुख तथ्य
केरल के तीन राज्य-संचालित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (V-Cs) का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति वाले एक कार्यक्रम में भाग लेना विवादों का केंद्र बन गया है। शैक्षणिक संगठनों, विश्वविद्यालय कर्मचारी निकायों और राजनीतिक दलों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और उच्च शिक्षा क्षेत्र में संघ परिवार के कथित वैचारिक प्रभाव पर चिंता जताई है।
विवरण
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कुलपतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में भाग लेना 'प्रबुद्ध केरल के लिए शर्मिंदगी' है और सवाल उठाया कि क्या ऐसे लोग सार्वजनिक विश्वविद्यालयों का नेतृत्व करने के योग्य हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS की विचारधारा को मानने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों का नेतृत्व करने के लिए अनुपयुक्त हैं, और मांग की कि यदि वे खुले तौर पर संगठन से जुड़ना चाहते हैं तो इस्तीफा दें। वेणुगोपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में नेतृत्व के पदों के लिए शैक्षणिक उत्कृष्टता, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
केरल शास्त्र साहित्य परिषद (KSSP) ने भी विश्वविद्यालय प्रमुखों के RSS-संबद्ध कार्यक्रम में भाग लेने पर चिंता व्यक्त की। संगठन ने कहा कि उच्च शिक्षा प्रशासकों की विशेष जिम्मेदारी है कि वे धर्मनिरपेक्षता, बहुलवाद और लोकतांत्रिक सिद्धांतों जैसे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखें। KSSP ने चेतावनी दी कि विश्वविद्यालय नेतृत्व और बहुसंख्यकवादी वैचारिक स्थितियों वाले संगठनों के बीच संबंध छात्रों और आम जनता में असहजता पैदा कर सकते हैं। संगठन ने जुलाई 2025 में कोच्चि में आयोजित RSS-समर्थित 'ज्ञान सभा शिक्षा शिखर सम्मेलन' के विवाद का भी उल्लेख किया, जिसमें कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की भागीदारी के कारण आलोचना हुई थी।
कर्मचारी संगठनों का आरोप
केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी संगठनों का परिसंघ (CUEO) ने संघ परिवार पर केरल के उच्च शिक्षा संस्थानों को 'भगवाकरण' करने का आरोप लगाया। संगठन ने आरोप लगाया कि नियुक्तियों और प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से राज्य भर के विश्वविद्यालयों में तेजी से वैचारिक हस्तक्षेप किया जा रहा है। परिसंघ ने विशेष रूप से महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में घटनाक्रमों को उजागर किया और आरोप लगाया कि कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति में स्थापित परंपराओं की अनदेखी की गई। इसके अलावा, प्रशासनिक निर्णय संघ परिवार के हितों को दर्शाते हैं। इसने विश्वविद्यालय मामलों में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप की भी आलोचना की और राज्य सरकार पर केंद्र द्वारा प्रोत्साहित शिक्षा नीतियों को लागू करने में सहायता करने का आरोप लगाया।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह विवाद केरल के उच्च शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते वैचारिक ध्रुवीकरण को उजागर करता है। शैक्षणिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर बहस जारी है।
FAQ
केरल के किन विश्वविद्यालयों के कुलपति RSS कार्यक्रम में शामिल हुए?
तीन राज्य-संचालित विश्वविद्यालयों के कुलपति इस कार्यक्रम में शामिल हुए, हालांकि उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
कांग्रेस ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?
AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इसे 'प्रबुद्ध केरल के लिए शर्मिंदगी' बताया और कुलपतियों से इस्तीफे की मांग की।
KSSP ने क्या चिंता जताई?
KSSP ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासकों का धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद जैसे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना विशेष दायित्व है।
स्रोत: www.thehindu.com