मुख्य तथ्य
केरल में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना के कारण निजी बस ऑपरेटरों को भारी राजस्व हानि का सामना करना पड़ रहा है। केरल प्राइवेट बस ऑपरेटर्स फेडरेशन ने मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वे भी महिलाओं को मुफ्त यात्रा देने को तैयार हैं, बशर्ते सरकार उन्हें मुआवजा दे।
प्रस्तावित मुआवजा योजना
फेडरेशन ने प्रस्ताव दिया कि यदि योजना निजी बसों पर लागू होती है, तो वे अपनी पूरी दैनिक आय सरकार को सौंप देंगे। बदले में, उन्होंने राज्य से प्रति किलोमीटर 55 रुपये का भुगतान मांगा है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, फेडरेशन ने सरकार द्वारा नियुक्त कंडक्टर और आधिकारिक टिकटिंग सिस्टम लागू करने की सिफारिश की। रखरखाव, कर्मचारी वेतन और अन्य परिचालन खर्च बस मालिकों द्वारा वहन किए जाएंगे।
वैकल्पिक मांगें
फेडरेशन ने वैकल्पिक उपायों के रूप में KSRTC द्वारा संचालित रूटों पर चलने वाली निजी बसों के लिए रोड टैक्स में पूर्ण छूट या आधी कीमत पर सब्सिडी वाले डीजल की मांग की। उन्होंने इन मांगों को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के समक्ष रखने की योजना बनाई है।
आंदोलन की चेतावनी
फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी किसी भी मांग को स्वीकार नहीं किया गया, तो वे जोरदार विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसी नीतियों से परिवहन क्षेत्र के एक वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
प्रभाव और चिंताएं
ऑपरेटरों के अनुसार, महिला यात्रियों का पूरी तरह से KSRTC बसों में शिफ्ट हो जाने से निजी सेवाओं में यात्री संख्या घट गई है, जिससे ईंधन लागत या कर्मचारी वेतन का भुगतान करना मुश्किल हो गया है और सेवाओं के ठप होने की संभावना बढ़ गई है। फेडरेशन के राज्य अध्यक्ष के.के. थॉमस, महासचिव हम्सा एरिक्कुन्नन और कोषाध्यक्ष एम.एस. प्रेमकुमार ने इस मुद्दे पर मीडिया को संबोधित किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- निजी बस ऑपरेटरों ने क्या मांग की है? उन्होंने सरकार से प्रति किलोमीटर 55 रुपये का भुगतान या रोड टैक्स में छूट या आधी दर पर डीजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
- निजी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा कैसे लागू होगी? ऑपरेटरों ने सरकार द्वारा नियुक्त कंडक्टर और आधिकारिक टिकटिंग सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया है।
- योजना से निजी बस ऑपरेटरों पर क्या प्रभाव पड़ा है? महिला यात्रियों के KSRTC बसों में शिफ्ट होने से निजी बसों में यात्री संख्या घट गई है, जिससे ईंधन और वेतन का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।
स्रोत: www.thehindu.com