मुख्य तथ्य
केरल में निपाह वायरस (NiV) का पहला प्रकोप 2018 में हुआ था, जिसमें 23 मामले सामने आए थे, जिनमें से 18 प्रयोगशाला में पुष्टि किए गए थे। मृत्यु दर 91% थी और केवल दो लोग बच पाए थे। तब से केरल में निपाह वायरस के कई प्रकोप हो चुके हैं।
केरल में निपाह वायरस का इतिहास
2019 में एर्नाकुलम में एक मामला दर्ज हुआ, जिसमें व्यक्ति बच गया। 2021 में मलप्पुरम में एक 12 वर्षीय लड़का संक्रमित पाया गया। 2023 में कोझिकोड में छह मामलों का क्लस्टर सामने आया। 2024 में मलप्पुरम में जुलाई और सितंबर में दो अलग-अलग संक्रमण हुए। 2025 में मलप्पुरम और पालक्काड़ में चार मामले दर्ज हुए, जो आपस में जुड़े नहीं थे। 2026 में कोझिकोड में एक 43 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित पाया गया, जो गंभीर रूप से बीमार है।
निपाह वायरस का प्राकृतिक भंडार
शोध ने भारतीय उड़ने वाली लोमड़ी (Pteropus medius) या फल चमगादड़ को केरल में निपाह वायरस का प्राकृतिक भंडार साबित किया है। 2018 के प्रकोप में लगभग 25% चमगादड़ों में वायरस पाया गया था। केरल वन अनुसंधान संस्थान के एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग सभी चमगादड़ बस्तियाँ मानव आवासों के निकट स्थित हैं, जिससे जूनोटिक संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
संक्रमण के कारण
केरल में निपाह वायरस का बार-बार संक्रमण पर्यावरणीय, जनसांख्यिकीय और जलवायु कारकों के संगम के कारण होता है। पश्चिमी घाट, जो केरल के पूर्वी भाग में स्थित है, दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है। उच्च जनसंख्या घनत्व और वन क्षेत्रों के निकट मानव बस्तियाँ वन्यजीवों के साथ संपर्क बढ़ाती हैं। वैज्ञानिक साहित्य वनों की कटाई, आवास विखंडन और शहरीकरण को उभरते जूनोटिक रोगों से जोड़ता है।
स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारी
2018 के प्रकोप ने केरल की स्वास्थ्य प्रणाली को चौंका दिया था, लेकिन इसके बाद राज्य ने नैदानिक एल्गोरिदम विकसित किए, नैदानिक क्षमता मजबूत की और संक्रमण नियंत्रण प्रथाओं में सुधार किया। राज्य में अज्ञात एटियलजि के तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम के मामलों की निगरानी की जाती है और वायरस अनुसंधान एवं नैदानिक प्रयोगशाला नेटवर्क का विस्तार किया गया है।
वन हेल्थ रणनीति
केरल सरकार ने 'वन हेल्थ' रणनीति के तहत 2.5 लाख से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का सामुदायिक निगरानी नेटवर्क बनाया है। 2023 में कोझिकोड में निपाह अनुसंधान और लचीलापन केंद्र स्थापित किया गया, जो सामुदायिक जागरूकता और क्षमता निर्माण पर काम कर रहा है। राज्य सरकार, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर निपाह के खिलाफ मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित करने की परियोजना पर काम कर रही है।
निष्कर्ष
केरल में निपाह वायरस का बार-बार संक्रमण एक गंभीर चुनौती है, लेकिन राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली ने तेजी से प्रतिक्रिया और रोकथाम में सक्षमता दिखाई है। वन हेल्थ दृष्टिकोण और सामुदायिक जागरूकता से संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निपाह वायरस का प्राकृतिक भंडार क्या है?
भारतीय उड़ने वाली लोमड़ी (Pteropus medius) या फल चमगादड़ निपाह वायरस का प्राकृतिक भंडार है। केरल के उत्तरी जिलों में चमगादड़ों में वायरस पाया गया है।
केरल में निपाह वायरस का संक्रमण कब-कब हुआ?
2018 में पहला प्रकोप (23 मामले), 2019 में एक मामला, 2021 में एक, 2023 में छह, 2024 में दो, 2025 में चार और 2026 में एक मामला दर्ज हुआ।
निपाह वायरस से बचाव के लिए केरल सरकार क्या कर रही है?
केरल सरकार ने वन हेल्थ केंद्र स्थापित किया, सामुदायिक निगरानी नेटवर्क बनाया, और निपाह के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित करने की परियोजना शुरू की है।
स्रोत: www.thehindu.com