मुख्य तथ्य
केरल की नवगठित यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार पर तटीय खनिज संसाधनों के निजीकरण का आरोप लगा है। पूर्व उद्योग मंत्री पी. राजीव ने शुक्रवार को संशोधित बजट प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस कदम से राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का निजी कंपनियों द्वारा दोहन हो सकता है।
विवरण
पी. राजीव ने कहा कि पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की थी, जो मूल्य संवर्धन पर केंद्रित था। उस बजट में केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड (KMML), KELTRON और केंद्रीय खान मंत्रालय के तहत नॉन-फेरस मटेरियल्स टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के साथ साझेदारी में ₹100 करोड़ के रेयर अर्थ क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की भी घोषणा की गई थी। यह प्रस्ताव बाद में केंद्रीय बजट में भी शामिल हुआ।
हालांकि, वर्तमान सरकार इस परियोजना से सार्वजनिक उपक्रमों को पूरी तरह बाहर करने और इसे पूर्णतः निजीकृत करने की योजना बना रही है, जो राज्य के लिए व्यवहार्य नहीं है। राजीव ने संशोधित बजट में गढ़े गए 'इन्वेस्ट केरलम' और 'ब्रांडिंग केरलम' शब्दों की भी आलोचना की, यह बताते हुए कि पिछली सरकार ने पहले ही 'इन्वेस्ट केरल' और 'केरल ब्रांड' जैसी पहल प्रस्तावित की थी।
इसके अलावा, विधानसभा ने 'इन्वेस्ट केरल' परियोजना के तहत मुख्यमंत्री की अध्यक्षता और उद्योग मंत्री की सह-अध्यक्षता वाली समिति के गठन का प्रावधान करते हुए एक नियम पारित किया था। राजीव ने कहा कि नई सरकार ने जो प्रस्तावित किया है, वह इसी नियम के तहत गठित समिति की संरचना में बदलाव मात्र है।
MSME योजनाओं पर सवाल
राजीव ने ₹100 करोड़ के आवंटन के साथ राज्य भर में 10,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) स्थापित करने के निर्णय पर भी सवाल उठाया, जबकि मिशन 1000 और मिशन वन लाख MSME जैसी दो चल रही परियोजनाएं पहले से मौजूद हैं। पहली परियोजना का उद्देश्य चयनित MSME को ₹100 करोड़ का कारोबार हासिल करने के लिए बढ़ाना है, जिसके तहत अब तक लगभग 543 MSME चुने जा चुके हैं। मिशन वन लाख का लक्ष्य चयनित MSME को ₹1 करोड़ का कारोबार हासिल करने में सहायता करना है।
राजीव ने कहा कि नई परियोजना घोषित करने के बजाय सरकार को मौजूदा पहलों को मजबूत करना चाहिए था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित बजट में उद्योग और आईटी विभाग के लिए कुल आवंटन में लगभग ₹400 करोड़ की कमी है।
प्रभाव और आगे की राह
इस विवाद ने केरल में खनिज संसाधनों के प्रबंधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार सार्वजनिक हितों की अनदेखी कर निजी हितों को बढ़ावा दे रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि निजीकरण से निवेश और रोजगार बढ़ेगा।
FAQ
केरल में किन खनिज संसाधनों के निजीकरण का आरोप है?
तटीय क्षेत्रों में स्थित दुर्लभ खनिज (rare earth) सहित महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के निजीकरण का आरोप है।
पूर्व मंत्री पी. राजीव ने नई सरकार पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि UDF सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को दरकिनार कर पूरी तरह निजीकरण की ओर बढ़ रही है, जो राज्य के लिए हितकर नहीं है।
पिछली LDF सरकार ने खनिज क्षेत्र में क्या योजना बनाई थी?
LDF सरकार ने रेयर अर्थ कॉरिडोर और ₹100 करोड़ के मिशन की घोषणा की थी, जिसमें KMML, KELTRON जैसे सार्वजनिक उपक्रम शामिल थे।
MSME योजनाओं को लेकर क्या विवाद है?
राजीव ने कहा कि मौजूदा मिशन 1000 और मिशन वन लाख के चलते नई 10,000 MSME योजना अनावश्यक है, बजाय मौजूदा योजनाओं को मजबूत करने के।