मामले की पृष्ठभूमि
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बीडीएस छात्र निथिन राज की मौत के मामले में आरोपी डॉ. एम.के. राम की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। डॉ. राम पूर्व में उस डेंटल कॉलेज के डेंटल एनाटॉमी विभाग के प्रमुख थे, जहां छात्र का शव मिला था।
छात्र के पिता का विरोध
सुनवाई के दौरान, मृतक छात्र के पिता ने विभिन्न आधारों पर जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत आरोप जोड़ने की मांग की, जो गैर-जमानती है। पिता ने तर्क दिया कि घटनाओं की एक श्रृंखला थी जो छात्र की मौत पर समाप्त हुई।
डॉ. राम का बचाव
डॉ. राम ने छात्र को प्रताड़ित करने के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि निथिन राज अपने ऋण चुकाने में विफल रहा था और लोन ऐप ऑपरेटरों द्वारा परेशान किया जा रहा था। उन्होंने रिमांड रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें कहा गया कि ऑपरेटरों द्वारा छात्र को कई कॉल करके जान से मारने की धमकी दी गई थी।
हाईकोर्ट की पिछली टिप्पणी
हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि सरकार को मेडिकल कॉलेजों में हो रही घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए और ऐसी कई घटनाएं सामने नहीं आतीं। अदालत ने इन घटनाओं पर रिपोर्ट प्राप्त करने और निवारक उपाय तथा दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने का सुझाव दिया था।
निचली अदालत का आदेश
कन्नूर जिला एवं प्रधान सत्र न्यायालय ने डॉ. राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
FAQ
केरल हाईकोर्ट ने किस मामले में फैसला सुरक्षित रखा?
केरल हाईकोर्ट ने बीडीएस छात्र निथिन राज की मौत मामले में आरोपी डॉ. एम.के. राम की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
डॉ. राम पर क्या आरोप हैं?
डॉ. राम पर छात्र को प्रताड़ित करने का आरोप है, जिससे उसकी मौत हुई। छात्र के पिता ने एससी/एसटी एक्ट के तहत भी आरोप जोड़ने की मांग की है।
डॉ. राम का बचाव क्या है?
डॉ. राम ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि निथिन राज ऋण चुकाने में विफल रहा था और लोन ऐप ऑपरेटरों द्वारा परेशान किया जा रहा था।