मुख्य तथ्य
केरल हाईकोर्ट ने मई 2025 में अलप्पुझा तट पर डूबे मालवाहक जहाज MSC Elsa 3 के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के अभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने केंद्र सरकार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और शिपिंग महानिदेशालय (DGS) से इस मामले में जवाब मांगा है।
विस्तृत जानकारी
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने टी.एन. प्रतापन और अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि एजेंसियों को यह बताना होगा कि EIA कैसे किया जाएगा, किन संस्थानों को सक्षम माना जाता है, और अध्ययन का दायरा क्या होगा। साथ ही, अदालत को यह भी सूचित करना होगा कि जहाज और उसके कंटेनरों के डूबने से उत्पन्न पर्यावरणीय और नौवहन संबंधी चिंताओं के समाधान के लिए कोई अंतरिम उपाय किए गए हैं या नहीं।
जहाज के कई कंटेनरों में खतरनाक कार्गो था, जिसमें 339.20 मीट्रिक टन कैल्शियम कार्बाइड शामिल था। अनुमानित 475 कंटेनर जहाज के साथ डूबे हुए हैं।
प्रभाव और चिंताएँ
हाईकोर्ट ने आगे पूछा कि क्या जहाज के मालिकों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों के निष्कर्षों को सत्यापित करने के लिए कोई स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसी, वैज्ञानिक संस्थान या तकनीकी सलाहकार नियुक्त किया गया है। साथ ही, मलबे और डूबे कंटेनरों की वर्तमान स्थिति का कोई स्वतंत्र मूल्यांकन किया गया है या नहीं, और क्या वे नौवहन संकट, पर्यावरणीय जोखिम या समुद्री पारिस्थितिकी और तटीय समुदायों के लिए खतरा पैदा करते हैं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
DGS के हलफनामे में कहा गया कि इस मामले में दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभाव, समुद्री पारिस्थितिकी को नुकसान, तटीय स्थिरता, नौवहन सुरक्षा और डूबे मलबे और उसके कार्गो से उत्पन्न संभावित भविष्य के जोखिम शामिल हैं। इन मुद्दों के निर्धारण के लिए सक्षम सरकारी एजेंसियों और वैधानिक पर्यावरण प्राधिकरणों द्वारा स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच आवश्यक है। अदालत ने कहा कि MoEFCC, संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और अन्य सक्षम वैज्ञानिक संस्थानों के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में एक व्यापक और स्वतंत्र EIA किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने कहा कि प्लास्टिक नर्डल्स सहित विभिन्न कार्गो ले जाने वाले कंटेनर अभी भी मलबे पर डेक से लटके हुए हैं। हालाँकि मालिकों और बचावकर्ताओं को मानसून के बाद मौसम में सुधार होने पर खतरनाक कार्गो और जहाज को हटाने की आवश्यकता थी, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, और उपचारात्मक उपाय ज्यादातर समुद्र तट और तटरेखा की सफाई तक ही सीमित रहे। याचिकाकर्ता ने कहा कि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो पर्यावरण को और अधिक नुकसान, समुद्री जैव विविधता को खतरा, तटरेखा का प्रदूषण और तटीय समुदायों की आजीविका और सुरक्षा को गंभीर नुकसान होने का खतरा है।
यह देखते हुए कि DGS EIA करने के लिए नोडल एजेंसी नहीं है, अदालत ने स्वप्रेरणा से MoEFCC को मामले में शामिल किया।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- केरल हाईकोर्ट ने MSC Elsa 3 डूबने पर EIA की कमी पर केंद्रीय एजेंसियों से जवाब मांगा है।
- जहाज में 475 कंटेनर डूबे हैं, जिनमें 339.20 MT कैल्शियम कार्बाइड जैसा खतरनाक पदार्थ है।
- अदालत ने MoEFCC को मामले में शामिल किया है और स्वतंत्र EIA की आवश्यकता पर बल दिया है।
- अब तक केवल तटीय सफाई ही की गई है, जबकि खतरनाक कार्गो को हटाने का काम नहीं हुआ है।
FAQ
MSC Elsa 3 कब और कहाँ डूबा?
MSC Elsa 3 मई 2025 में केरल के अलप्पुझा तट पर डूब गया था।
जहाज में कितने कंटेनर थे और उनमें क्या खतरनाक सामान था?
जहाज में लगभग 475 कंटेनर डूबे हुए हैं, जिनमें 339.20 मीट्रिक टन कैल्शियम कार्बाइड और प्लास्टिक नर्डल्स जैसे खतरनाक पदार्थ थे।
केरल हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
कोर्ट ने केंद्र, MoEFCC और DGS से समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव का आकलन करने के लिए EIA करने का तरीका, संस्थानों की पहचान और अंतरिम उपायों के बारे में जवाब मांगा है।
क्या अब तक कोई सफाई या बचाव कार्य हुआ है?
मालिकों और बचावकर्ताओं को मानसून के बाद खतरनाक कार्गो और जहाज को हटाना था, लेकिन केवल समुद्र तट की सफाई तक सीमित कदम उठाए गए हैं।