मुख्य तथ्य
केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने वॉइज़िट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें एड-टेक कंपनी बायजू (थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड) के दिवालिया कार्यवाही में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी।
विवरण
वॉइज़िट ने बायजू को 100 मिलियन डॉलर का ऋण दिया था, जिसे बायजू ने चुकाने में चूक की। इसके बाद वॉइज़िट ने बायजू की संपत्तियों पर स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि दिवालिया कार्यवाही में विदेशी संस्थाओं और क्षेत्राधिकारों की संलिप्तता, भारतीय मूल की संपत्तियों का हस्तांतरण, महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे पर अनधिकृत नियंत्रण, और पूंजी एवं बौद्धिक संपदा का भारत से बाहर निष्कर्षण जैसी अनियमितताएं हुई हैं।
अदालत का निर्णय
न्यायमूर्ति के. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश से सहमति जताई जिसमें जांच से इनकार किया गया था। एकल पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने गलत मंच का चयन किया और याचिका वापस लेते समय नई याचिका दाखिल करने की अनुमति नहीं ली। साथ ही, बेंगलुरु पुलिस में दर्ज शिकायत पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगा दी थी।
प्रभाव
इस फैसले से बायजू के दिवालिया मामले में जांच की संभावना कम हो गई है। बायजू वर्तमान में भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड के समक्ष दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रहा है। कंपनी ने 2018 और 2022 के बीच वैश्विक स्तर पर 1.42 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया था।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह मामला भारत में दिवालिया कार्यवाही में विदेशी हस्तक्षेप और कानूनी जटिलताओं को उजागर करता है। याचिकाकर्ता ने सीबीआई, ईडी और एनआईए से जांच की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
FAQ
केरल हाईकोर्ट ने किस याचिका को खारिज किया?
केरल हाईकोर्ट ने वॉइज़िट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें बायजू के दिवालिया कार्यवाही में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी।
वॉइज़िट टेक्नोलॉजी का बायजू से क्या विवाद है?
वॉइज़िट ने बायजू को 100 मिलियन डॉलर का ऋण दिया था, जिसे बायजू ने चुकाने में चूक की। इसके बाद वॉइज़िट ने बायजू की संपत्तियों पर स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की।
केरल हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करने का क्या कारण बताया?
अदालत ने कहा कि वह कर्नाटक हाईकोर्ट में पहले से लंबित कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। साथ ही, याचिकाकर्ता ने गलत मंच का चयन किया था और पिछली याचिका वापस लेते समय नई याचिका दाखिल करने की अनुमति नहीं ली थी।
स्रोत: www.thehindu.com