Kerala सरकार का बड़ा फैसला
केरल की कांग्रेस नीत सरकार ने मेट्रो मैन ई. श्रीधरन के Rs 60,000 करोड़ के सोलर रेल कॉरिडोर प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। सरकार ने परियोजना की आर्थिक और पर्यावरणीय व्यवहार्यता पर गंभीर चिंताएं जताई हैं। पिछले महीने गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस परियोजना को मौजूदा स्वरूप में लागू नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मीडिया को बताया कि विशेषज्ञ समिति ने परियोजना को आगे बढ़ाने या भूमि अधिग्रहण जैसे कदम उठाने के खिलाफ सिफारिश की है। उन्होंने कहा, 'DMRC रिपोर्ट एक अच्छा आर्थिक मॉडल नहीं है। कॉरिडोर में लॉजिस्टिक्स मूवमेंट का कोई उल्लेख नहीं है, यह केवल यात्री आवाजाही पर निर्भर है। परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों की संख्या स्पष्ट नहीं है। फ्रेट मूवमेंट के बिना यह कॉरिडोर आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं होगा। विशेषज्ञ समिति ने इस प्रकृति की मेगा परियोजना के लिए केरल के सीमित वित्तीय संसाधनों को भी चिन्हित किया है।'
परियोजना की पृष्ठभूमि
ई. श्रीधरन ने फरवरी में अपने गृहनगर पोन्नानी में परियोजना के लिए एक कार्यालय खोला था। पिछली CPI(M) सरकार इस प्रस्ताव के प्रति उदासीन थी। नई सरकार के आने के बाद श्रीधरन ने परियोजना को पुनर्जीवित किया और मई में DMRC की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रस्तावित केरल हाई-स्पीड रेल (KHSR) तिरुवनंतपुरम (पूजापुरा) से कन्नूर (मुंडयाड) तक 473.20 किमी की डबल लाइन है, जिसमें 23 स्टेशन होंगे। यह लाइन पूरी तरह से एलिवेटेड होगी, सिवाय तिरुवनंतपुरम शहर में 6.5 किमी की सुरंग के। यह कन्नूर को छोड़कर सभी केरल हवाई अड्डों को जोड़ेगी, जो एक विशेष 10 किमी सड़क से जुड़ा होगा। तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक यात्रा का समय 3 घंटे 30 मिनट होने का अनुमान था।
पर्यावरणीय और आर्थिक चिंताएं
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सिस्टम की ऊर्जा जरूरतें एक कैप्टिव सोलर नेटवर्क से पूरी होंगी, जो अतिरिक्त बिजली KSEB को बेचेगा। यदि लागू होता, तो यह दुनिया का पहला ग्रीन रेल कॉरिडोर बनता। हालांकि, विशेषज्ञ समिति ने पाया कि परियोजना का आर्थिक मॉडल कमजोर है और पर्यावरणीय प्रभावों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है।
लागत और वित्तपोषण
परियोजना की लागत Rs 60,000 करोड़ अनुमानित है, जिसमें से Rs 36,000 करोड़ केंद्र और राज्य द्वारा 51:49 के अनुपात में इक्विटी के रूप में दिए जाने थे, और शेष Rs 24,000 करोड़ क्राउडफंडिंग से जुटाए जाने थे।
सरकार का रुख
मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि सरकार निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करेगी। उन्होंने कहा, 'DMRC रिपोर्ट अधूरी है। जबकि पिछली सरकार K-Rail, SilverLine परियोजना के साथ आगे बढ़ी, हमने पर्यावरणीय चिंताओं को उठाते हुए इसका विरोध किया। हम K-Rail के खतरों को दोहराना नहीं चाहते।'
FAQ
Kerala सरकार ने E Sreedharan के सोलर रेल प्रोजेक्ट को क्यों खारिज किया?
विशेषज्ञ समिति ने पाया कि प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है, इसमें फ्रेट मूवमेंट का अभाव है, और यात्री संख्या स्पष्ट नहीं है। साथ ही, राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए इसे अव्यवहारिक बताया गया।
प्रस्तावित सोलर रेल कॉरिडोर की लागत कितनी है?
प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत Rs 60,000 करोड़ है, जिसमें से Rs 36,000 करोड़ केंद्र और राज्य द्वारा 51:49 के अनुपात में इक्विटी के रूप में दिए जाने थे, और Rs 24,000 करोड़ क्राउडफंडिंग से जुटाए जाने थे।
क्या यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से रद्द हो गया है?
अभी सरकार ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करने का निर्णय लिया है। फिलहाल प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने या भूमि अधिग्रहण जैसे कदम उठाने की अनुशंसा नहीं की गई है।