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केरल में खाद्यान्न घोटाला: 95.7 लाख राशन कार्ड धारकों के लिए आरक्षित अनाज कालाबाजारी में बेचा गया

प्रमुख तथ्य केरल में विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) ने एक राज्यव्यापी ऑपरेशन के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का पर्दाफाश किया है। इस घोटाले में लगभग 95.7 लाख राशन कार्ड…

प्रमुख तथ्य

केरल में विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) ने एक राज्यव्यापी ऑपरेशन के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का पर्दाफाश किया है। इस घोटाले में लगभग 95.7 लाख राशन कार्ड धारकों के लिए आरक्षित अनाज को ब्लैक मार्केट में बेचा गया।

ऑपरेशन फूड सिक्योरिटी नामक इस अभियान में 14 एनएफएसए गोदामों और 54 राशन दुकानों को निशाना बनाया गया। विजिलेंस टीम ने खुद को कालाबाजारी करने वालों के रूप में पेश करके सब्सिडी वाले अनाज को बाजार मूल्य से कम दाम पर खरीदने का प्रयास किया, जिससे भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ।

घोटाले का विवरण

केरल सरकार खाद्य सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण पर सालाना लगभग 2400 करोड़ रुपये खर्च करती है, जिसमें राशन वितरण, डीलर कमीशन और वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांगों के लिए डोरस्टेप डिलीवरी पर 100 करोड़ रुपये शामिल हैं। जांच में पाया गया कि लगभग 30% सब्सिडी वाला अनाज लाभार्थियों तक नहीं पहुंचता, बल्कि एक माफिया द्वारा कालाबाजारी में बेच दिया जाता है।

इस माफिया में राशन दुकान लाइसेंसधारी, गोदाम प्रबंधक, परिवहन ठेकेदार और सिविल सप्लाई विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जांचकर्ताओं ने पाया कि अधिकारियों ने बड़ी रिश्वत लेकर सब्सिडी वाले अनाज को पोल्ट्री फार्म मालिकों और होटल उद्योग को बेच दिया। तिरुवनंतपुरम में एक राशन डीलर को पोल्ट्री फार्म मालिक से सालाना लाखों रुपये मिलने के डिजिटल सबूत मिले।

धोखाधड़ी के तरीके

जांच में सामने आया कि राशन डीलरों ने बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली से छेड़छाड़ की और लाभार्थियों के आधार से जुड़े मोबाइल नंबरों पर प्राप्त ओटीपी का दुरुपयोग किया। इससे वे कालाबाजारी को वैध ठहरा सके। इसके अलावा, परिवहनकर्ता बिना अनिवार्य ट्रैकिंग डिवाइस वाले ट्रकों का उपयोग कर रहे थे, जिससे सरकारी वाहन ट्रैकिंग सिस्टम को धोखा दिया जा सके।

सरकारी अधिकारियों ने फर्जी बिलिंग और स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी को अनदेखा करके इस रैकेट में मदद की। जांचकर्ताओं ने बताया कि राशन दुकानों के लेन-देन अधिकतर कागजी थे, और भौतिक स्टॉक की जांच में रजिस्टर में दर्ज मात्रा से अधिक अनाज और चीनी पाई गई।

प्रभाव और आगे की कार्रवाई

इस घोटाले से सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। विजिलेंस ब्यूरो के महानिदेशक मनोज अब्राहम ने इस ऑपरेशन की निगरानी की। आगे की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

  • यह घोटाला केरल में खाद्य सुरक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
  • लाभार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने राशन कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबरों को अपडेट रखें और किसी भी अनियमितता की शिकायत करें।
  • सरकार को ई-पीओएस मशीनों और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में खाद्यान्न घोटाला क्या है?

यह एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला है जिसमें सब्सिडी वाले खाद्यान्न को कालाबाजारी में बेचा गया। विजिलेंस ब्यूरो ने ऑपरेशन फूड सिक्योरिटी के तहत 14 गोदामों और 54 राशन दुकानों पर छापेमारी की।

इस घोटाले में कितने लोग प्रभावित हुए?

लगभग 95.7 लाख राशन कार्ड धारक प्रभावित हुए, जिनके लिए आरक्षित अनाज कालाबाजारी में बेचा गया।

सरकार को कितना नुकसान हुआ?

सरकार सालाना 2400 करोड़ रुपये खाद्य सुरक्षा पर खर्च करती है, जिसमें से 30% अनाज गबन हो जाता है, जिससे सैकड़ों करोड़ का नुकसान होता है।

इस घोटाले में कौन से लोग शामिल हैं?

राशन दुकान लाइसेंसधारी, गोदाम प्रबंधक, परिवहन ठेकेदार और सिविल सप्लाई विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

स्रोत: www.thehindu.com

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