केरल बजट 2025-26: UDF सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण पर सवाल
केरल में दशकों बाद सत्ता में आई UDF सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया है, जिसमें आर्थिक नीतियों में बुनियादी बदलाव के संकेत हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में राजकोषीय तनाव से निपटने के लिए ठोस उपायों का अभाव है और यह पिछली LDF सरकार की योजनाओं को ही दोहराता नजर आता है।
मुख्य तथ्य
- बजट का कुल आकार घटा दिया गया है, जबकि संसाधन जुटाने की कोई ठोस योजना नहीं है।
- KIIFB (केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड) की आलोचना की गई है और इसे पुनर्गठित करने के लिए एक समिति बनाई गई है।
- वाहन कर में कटौती की गई है, जो KIIFB के राजस्व का प्रमुख स्रोत था।
- भूमि सुधार 2.0 की घोषणा की गई है, जिसमें भूमि बैंक बनाने और निजी निवेश को बढ़ावा देने की योजना है।
- प्रति परिवार 25 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की घोषणा की गई है, लेकिन इसके वित्तपोषण पर सवाल उठ रहे हैं।
विस्तृत विश्लेषण
राजकोषीय तनाव और संसाधन जुटाने की चुनौती
बजट में राजकोषीय तनाव को कम करने के लिए सरकारी खर्च में कटौती पर जोर दिया गया है, लेकिन नए संसाधन जुटाने के लिए कोई नवाचारी कदम नहीं उठाए गए हैं। व्हाइट पेपर में बताई गई चुनौतियों जैसे कम प्रेषण, मुद्रास्फीति और राजकोषीय दबाव का समाधान बजट में नहीं दिखता।
KIIFB का भविष्य
पिछली LDF सरकार के प्रमुख बुनियादी ढांचा वित्तपोषण मॉडल KIIFB को इस बजट में आलोचना का सामना करना पड़ा है। सरकार ने KIIFB को पुनर्गठित करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई है, जबकि वाहन कर में कटौती से इसके राजस्व पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भूमि सुधार 2.0 और निजी पूंजी
भूमि सुधार 2.0 के तहत भूमि का पूलिंग कर भूमि बैंक बनाने और राज्य को निजी पूंजी के लिए गंतव्य बनाने की योजना है। हालांकि, विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन के इस बयान कि 'राज्य अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार के बजाय सुविधाकर्ता बना रहेगा', से सरकार के वास्तविक इरादों पर सवाल उठते हैं। मिशन समुद्र और दुर्लभ पृथ्वी कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं से कॉरपोरेट नियंत्रण बढ़ने और आजीविका तथा पर्यावरण संबंधी चिंताओं के हाशिए पर जाने की आशंका है।
स्वास्थ्य बीमा योजना का वित्तीय बोझ
चुनावी वादे के अनुरूप 25 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की घोषणा की गई है, लेकिन इसके प्रीमियम का खर्च राज्य के वार्षिक स्वास्थ्य बजट के बराबर हो सकता है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है।
केंद्र सरकार से संबंध
बजट में केंद्र सरकार द्वारा केरल के हितों की उपेक्षा को लेकर कोई ठोस रुख नहीं अपनाया गया है। पिछली सरकार के 20,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया गया था, लेकिन वर्तमान वित्त मंत्री अपने वादों को पूरा करने के लिए यथार्थवादी संसाधन आधार खोजने में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।
अन्य प्रमुख बिंदु
- बजट में कल्याणकारी पेंशन, वायनाड टाउनशिप, अत्यधिक गरीबी उन्मूलन और लाइफ मिशन जैसी पिछली सरकार की प्रमुख योजनाओं का कोई उल्लेख नहीं है।
- मुद्रास्फीति, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है और बढ़ने की संभावना है, पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया है।
- संसाधन जुटाने के लिए केवल कर बकाया पर माफी की घोषणा की गई है, जो ओम्मन चांडी स्वास्थ्य बीमा योजना और MSMEs के विस्तार के लिए पर्याप्त नहीं है।
निष्कर्ष
केरल का नया बजट आर्थिक नीतियों में बदलाव के संकेत देता है, लेकिन राजकोषीय तनाव से निपटने और संसाधन जुटाने में यह अपर्याप्त साबित हो सकता है। सरकार को सतत विकास के लिए उधारी और ऋण प्रबंधन पर स्पष्ट रणनीति अपनानी होगी।
स्रोत: www.thehindu.com