मुख्य तथ्य
तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के कटपाड़ी के पास अम्माननकुप्पम गांव में स्थित एक पुराने पुल की मरम्मत के बाद भी उसे खोलने में देरी हो रही है। इस वजह से सैकड़ों पैदल यात्री, किसान, व्यापारी और छात्र हर दिन रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं। यह पुल ब्रिटिश काल में 1890 के दशक में बनाया गया था और इसकी मरम्मत दक्षिण रेलवे द्वारा की गई है।
विस्तार से जानकारी
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह पुल कम से कम 10 आसपास के गांवों के लोगों को कटपाड़ी, गुडियाथम, वेल्लोर और रानीपेट जैसे बड़े शहरों से जोड़ता है। पुल बंद होने के कारण लोगों को रेलवे ट्रैक पार करना पड़ रहा है, जो बेहद खतरनाक है। एक निवासी जी. सुदर ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों से पुल न खुलने के कारण निवासियों को आस-पास के इलाकों में जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार करना पड़ रहा है। स्कूली छात्र, कार्यालय जाने वाले, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।'
पुल की मरम्मत और देरी का कारण
दक्षिण रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि यह पुल कई वर्षों में पहली बार मरम्मत किया गया है। नियमित क्षेत्रीय निरीक्षण में पाया गया कि ब्रिटिश काल की यह संरचना कमजोर हो गई थी। चूंकि रेलवे ट्रैक पुल के ऊपर से गुजरता है, इसलिए पुल की स्थिरता सुरक्षा के लिए चिंता का विषय थी। अधिकारियों ने कहा, 'मरम्मत में मुख्य रूप से आर्च के आकार के पुल को मजबूत करना शामिल था। मरम्मत पूरी होने के बावजूद, पुल के मजबूत हिस्से को क्योरिंग (सुखाने) की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसके कारण इसे जनता के लिए नहीं खोला जा सका। यह अगले सप्ताह तक खोल दिया जाएगा।'
प्रभाव और स्थानीय लोगों की परेशानी
पुल बंद होने से लोगों को कम से कम 10 किमी का चक्कर लगाकर निकटतम रेलवे ओवरब्रिज या लेवल क्रॉसिंग तक जाना पड़ रहा है। यह पुल मूल रूप से मानसून के दौरान ट्रैक को जलमग्न होने से बचाने के लिए बनाया गया था। चेन्नई-बेंगलुरु रेल मार्ग पर पालर नदी के किनारे ऐसे 100 से अधिक संकरे पुल हैं। वर्षों से यह पुल स्थानीय लोगों के लिए आवागमन का मुख्य मार्ग बन गया था और बीमार लोगों को गुडियाथम के सरकारी तालुक अस्पताल ले जाने के लिए भी जीवनरेखा था।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- पुल की मरम्मत पूरी हो चुकी है, लेकिन क्योरिंग के कारण इसे खोलने में देरी हुई है।
- अगले सप्ताह तक पुल खुलने की उम्मीद है, जिससे लोगों को रेलवे ट्रैक पार करने की मजबूरी खत्म हो जाएगी।
- फिलहाल लोगों को सुरक्षा के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कटपाड़ी के पास पुल की मरम्मत क्यों की गई?
ब्रिटिश काल में 1890 के दशक में बने इस पुल की संरचना कमजोर हो गई थी, जिससे रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को खतरा था। दक्षिण रेलवे ने नियमित निरीक्षण के बाद इसे मजबूत करने का काम शुरू किया।
पुल खोलने में देरी का कारण क्या है?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मरम्मत के बाद पुल के मजबूत हिस्से को क्योरिंग (सुखाने) की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसके कारण इसे खोलने में देरी हुई। अगले सप्ताह तक इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
पुल बंद होने से स्थानीय लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा?
स्कूली बच्चों, कार्यालय जाने वालों, महिलाओं और बुजुर्गों को रेलवे ट्रैक पार करना पड़ रहा है, जो जानलेवा हो सकता है। साथ ही, लोगों को 10 किमी का चक्कर लगाकर रेलवे ओवरब्रिज या लेवल क्रॉसिंग तक जाना पड़ रहा है।