Desh Duniya | कश्मीरी पंडित

कश्मीरी पंडितों की वापसी: ‘निर्वासन से उत्कृष्टता’ की ओर ऐतिहासिक कदम

मुख्य तथ्य श्रीनगर में 13 जून, 2026 को आयोजित ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडितों की वापसी को ‘सबसे सच्ची जीवन’ बताया। यह आयोजन ‘निर्वासन से उत्कृष्टता’ विषय…

मुख्य तथ्य

श्रीनगर में 13 जून, 2026 को आयोजित ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडितों की वापसी को 'सबसे सच्ची जीवन' बताया। यह आयोजन 'निर्वासन से उत्कृष्टता' विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के रूप में हुआ, जिसमें देश-विदेश से लगभग 100 पंडितों ने भाग लिया।

विस्तार से

डॉ. सुरिंदर कौल के नेतृत्व में ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा ने 'प्रगाश' नामक पहल शुरू की है, जिसे आठ पंडित संगठनों का समर्थन प्राप्त है। इस पहल के तहत पंडितों ने छह दिनों तक घाटी के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे मार्तंड मंदिर, खीर भवानी और शारदा पीठ का दौरा किया। डॉ. कौल ने कहा, 'आतंकवाद अब कश्मीर में डर का कारण नहीं रहा। हम कुपवाड़ा के टिक्कर से श्रीनगर रात में आए, दलगेट पर्यटकों और विक्रेताओं से गुलजार था। हम इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं।'

प्रभाव और प्रतिक्रियाएं

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने समुदाय से आह्वान किया कि वे जम्मू-कश्मीर में उद्योग, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थान स्थापित करें। उन्होंने कहा, 'जो एक बार अपनी मातृभूमि से उखड़ गए थे, वे लौट रहे हैं और यह वापसी सबसे सच्ची जीत है।' पूर्व डीजीपी आर.आर. स्वैन को भी समुदाय की वापसी योजनाओं में शामिल किया गया। वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी ने कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास के लिए शीर्ष समिति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

यह घटनाक्रम कश्मीर में सामान्य स्थिति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय भर्ती में गिरावट और आतंकी हमलों में कमी ने पंडितों के वापसी के माहौल को बेहतर बनाया है। हालांकि, पुनर्वास और एकीकरण की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव क्या है?

यह एक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है जो श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (SKICC) में आयोजित हुआ। इसका विषय 'निर्वासन से उत्कृष्टता तक: कश्मीरी पंडित समुदाय की लचीलापन, पुनर्जागरण और वापसी की यात्रा' था।

प्रगाश पहल क्या है?

प्रगाश पहल ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा के प्रमुख डॉ. सुरिंदर कौल द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक संवाद, विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामुदायिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

कश्मीरी पंडितों की वापसी में मुख्य बाधाएं क्या हैं?

मुख्य बाधाओं में सुरक्षा चिंताएं, आर्थिक पुनर्वास, और सामाजिक एकीकरण शामिल हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में आतंकवादी घटनाओं में कमी और स्थानीय भर्ती में गिरावट ने वापसी के माहौल को बेहतर बनाया है।

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