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Karnataka High Court ने होमस्टे नियमन के लिए व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया

मुख्य तथ्य कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को होमस्टे के संचालन और पर्यवेक्षण के लिए एक व्यापक नीति और नियामक ढांचा तैयार करने की व्यवहार्यता पर विचार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश…

मुख्य तथ्य

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को होमस्टे के संचालन और पर्यवेक्षण के लिए एक व्यापक नीति और नियामक ढांचा तैयार करने की व्यवहार्यता पर विचार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुरज गोविंदराज ने कोडागु जिले के पोन्नमपेट तालुक के कुट्टा गांव में एक होमस्टे के पंजीकरण रद्द करने के मामले में सुनाया।

मामले का विवरण

अप्रैल में एक अमेरिकी नागरिक के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना के बाद जिला अधिकारियों ने होमस्टे का पंजीकरण रद्द कर दिया था। अदालत ने पाया कि यह रद्दीकरण बिना नोटिस जारी किए और कर्नाटक पर्यटन व्यापार (सुविधा और विनियमन) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों का पालन किए बिना किया गया। अदालत ने रद्दीकरण आदेश को कारण बताओ नोटिस में बदल दिया और होमस्टे मालिक को जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।

अदालत की टिप्पणियां

अदालत ने कहा कि होमस्टे के खिलाफ पर्यटकों, पड़ोसियों, स्थानीय अधिकारियों और अन्य हितधारकों की शिकायतों पर कार्रवाई से उत्पन्न विवादों और याचिकाओं की संख्या बढ़ रही है। इसलिए, एक समन्वित ढांचे की आवश्यकता है।

नौ महत्वपूर्ण क्षेत्र

अदालत ने नौ क्षेत्रों की पहचान की जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है:

  • आवासीय भवनों में अग्नि सुरक्षा उपाय
  • खाद्य सुरक्षा और रसोई स्वच्छता मानक
  • भवन अनुपालन और ज़ोनिंग नियम
  • अतिथि सुरक्षा और अनिवार्य पहचान सत्यापन
  • उपभोक्ता संरक्षण और मूल्य पारदर्शिता
  • स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन मानक
  • विभिन्न सरकारी विभागों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन
  • संरचित और मनमानी रहित निरीक्षण तंत्र

छोटे और बड़े होमस्टे में अंतर

अदालत ने कहा कि छोटे परिवार-संचालित होमस्टे और बड़े वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के बीच अंतर किया जाना चाहिए। नियामक आवश्यकताएं संचालन के पैमाने और प्रकृति के अनुपात में होनी चाहिए ताकि छोटे संचालकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े और बड़े संचालकों की पर्याप्त निगरानी हो सके।

प्रभाव और आगे की राह

अदालत ने कहा कि समन्वित ढांचे के अभाव में होमस्टे संचालकों को अक्सर आवश्यक अनुमोदन और सक्षम प्राधिकारी के बारे में अनिश्चितता रहती है, जबकि प्रवर्तन एजेंसियां असंगत दृष्टिकोण अपना सकती हैं। एक समेकित नियामक ढांचा अनुपालन को सुविधाजनक बनाएगा और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करेगा।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

यह आदेश होमस्टे संचालकों और पर्यटकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे होमस्टे के नियमन में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद है। राज्य सरकार को अब एक व्यापक नीति तैयार करने पर विचार करना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने होमस्टे नियमन के लिए क्या निर्देश दिए हैं?

अदालत ने राज्य सरकार को होमस्टे की स्थापना, संचालन और पर्यवेक्षण के लिए एक व्यापक नीति और नियामक ढांचा तैयार करने की व्यवहार्यता पर विचार करने का निर्देश दिया है।

यह निर्देश किस मामले में दिया गया?

यह निर्देश कोडागु जिले के कुट्टा गांव में एक होमस्टे के पंजीकरण रद्द करने के मामले में दिया गया, जहां एक अमेरिकी नागरिक के साथ कथित यौन उत्पीड़न हुआ था।

अदालत ने होमस्टे के पंजीकरण रद्द करने के आदेश को क्यों खारिज किया?

अदालत ने कहा कि जिला अधिकारियों ने बिना नोटिस जारी किए और कर्नाटक पर्यटन व्यापार अधिनियम, 2015 के प्रावधानों का पालन किए बिना पंजीकरण रद्द कर दिया।

अदालत ने किन क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई?

अदालत ने अग्नि सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, भवन अनुपालन, अतिथि सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, विभागीय जिम्मेदारियों का स्पष्टीकरण और निरीक्षण तंत्र जैसे नौ क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

स्रोत: www.thehindu.com

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