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कर्नाटक में टाटा पावर के बिजली वितरण लाइसेंस पर किसान संगठन का विरोध

मुख्य तथ्य कर्नाटक में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा 15 जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किए जाने के बाद, फेडरेशन ऑफ कर्नाटक फार्मर्स ऑर्गेनाइजेशन ने सोमवार को कर्नाटक विद्युत नियामक…

मुख्य तथ्य

कर्नाटक में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा 15 जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किए जाने के बाद, फेडरेशन ऑफ कर्नाटक फार्मर्स ऑर्गेनाइजेशन ने सोमवार को कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (KERC) में औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई।

विस्तृत जानकारी

संगठन के अध्यक्ष कुरुबुर शांता कुमार ने कहा, "हमने KERC अधिकारियों से टाटा पावर के आवेदन को खारिज करने का अनुरोध किया है। वे मुंबई स्थित हैं और राज्य में उनका अपना वितरण तंत्र नहीं है। ऐसे में वे लाइसेंस के लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं?" उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने अपनी याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह गुणवत्तापूर्ण सेवा और कुशल प्रबंधन कैसे प्रदान करेगी।

शांता कुमार ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 14 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी कंपनी को लाइसेंस के लिए आवेदन करने से पहले अपना बिजली वितरण नेटवर्क होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, टाटा पावर के पास ऐसा कोई नेटवर्क नहीं है, इसलिए उनका आवेदन खारिज होने योग्य है।

प्रभाव और अन्य प्रतिक्रियाएं

इससे पहले, कर्नाटक बिजली उपभोक्ता संघ ने भी KERC में आपत्ति दर्ज कराई थी। वहीं, कर्नाटक पावर एम्प्लॉइज यूनियन ने निजी कंपनी के प्रवेश के खिलाफ 30 दिन का अभियान शुरू किया है। किसान संगठन का मानना है कि निजी खिलाड़ियों को बिजली वितरण में शामिल करने से सार्वजनिक हित प्रभावित होगा।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

  • टाटा पावर ने कर्नाटक के 15 जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
  • किसान संगठन का कहना है कि कंपनी के पास राज्य में अपना वितरण नेटवर्क नहीं है, जो कानूनी आवश्यकता है।
  • KERC को आवेदन पर निर्णय लेना है, जबकि उपभोक्ता संघ और कर्मचारी संघ भी विरोध कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाटा पावर ने कर्नाटक में लाइसेंस के लिए आवेदन क्यों किया?

टाटा पावर ने कर्नाटक के 15 जिलों में समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस पाने के लिए KERC में आवेदन किया है।

किसान संगठन का मुख्य आपत्ति क्या है?

संगठन का कहना है कि टाटा पावर के पास राज्य में अपना वितरण नेटवर्क नहीं है, जो इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 14 के अनुसार अनिवार्य है।

KERC क्या है?

KERC कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग है, जो राज्य में बिजली से संबंधित नियमों और लाइसेंस को मंजूरी देता है।

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