प्रमुख तथ्य
दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज पार्श्वगायिका एस. जानकी का 88 वर्ष की आयु में मैसूर में निधन हो गया। उन्होंने कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी सहित कई भाषाओं में हज़ारों गीत गाए। उनकी आवाज़ की मिठास और बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें 'दक्षिण भारतीय संगीत की रानी' का खिताब दिलाया।
विवरण
एस. जानकी का जन्म 1938 में आंध्र प्रदेश में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपना अधिकांश करियर कन्नड़ सिनेमा में बिताया। वह संगीतकार इलैयाराजा की पसंदीदा गायिका थीं। संगीतकार गुरुकिरण ने कहा, 'वह इलैयाराजा की पसंदीदा थीं। यह एक सराहनीय उपलब्धि है, क्योंकि इलैयाराजा एक सूक्ष्म पूर्णतावादी हैं। उन दिनों पिच करेक्शन की प्रक्रिया नहीं थी। इसलिए इतनी उच्च गुणवत्ता बनाए रखना उनकी प्रतिभा का प्रमाण है।'
फिल्म 'बन्नदा गेलेयारु' (1983) का गीत 'बन्नदा गेलेयारु' पुराने बेंगलुरु के आकर्षण को दर्शाता है और उन लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है जो शहर के तेजी से बदलाव से पहले वहां बड़े हुए। एस. जानकी और एस.पी. बालासुब्रमण्यम के बीच की रसायन एक पुरानी यादों का सुखद अहसास पैदा करती है।
फिल्म 'हुडुगी बेकु' (1987) के गीत 'हुडुगी बेकु' में उन्होंने युवा ऊर्जा के साथ प्रेम की अभिव्यक्ति की। फिल्म 'यारे नीन्ना चेलुवे' (1981) का गीत 'यारे नीन्ना चेलुवे' कन्नड़ संस्कृति का अभिन्न अंग बन गया।
प्रभाव और विरासत
गीतकार वी. नागेंद्र प्रसाद ने कहा, 'वह अगली पीढ़ी के पार्श्वगायकों के लिए एक महान रोल मॉडल हैं। कन्नड़ न होने के बावजूद, उन्होंने भाषा सीखी। उनमें गीतों के लिए सही अभिव्यक्ति देने की क्षमता थी।' संगीतकार आर.पी. पटनायक ने कहा, 'जब वह गाती थीं तो उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं दिखता था। कोई भी अभिव्यक्ति, जिसमें नकल भी शामिल है, उनके गले से निकलती थी।'
फिल्म इतिहासकार के. पुट्टास्वामी ने कहा, 'कन्नड़ रेट्रो हिट्स में जानकी की मजबूत उपस्थिति है। उनके एकल क्लासिक्स में 'बेल्ली मोडागालु' (1962), 'अम्मा एंदरे' (1969), 'होसा बेलाकु' (1970) शामिल हैं।'
उन्होंने हर प्रसिद्ध संगीतकार के लिए प्रतिष्ठित गीत गाए। विजय भास्कर के लिए 'अमरा मधुरा प्रेमा' (1969), रंगा राव के लिए 'हाडु हाडु' (1970), राजन-नागेंद्र के लिए 'मुंगारु माले' (1973), जी.के. वेंकटेश के लिए 'मोडाला मले' (1974), और एम. रंगा राव के लिए 'बारे बारे' (1984) उल्लेखनीय हैं।
यहां तक कि महान जानकी को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने एक रियलिटी शो में स्वीकार किया था कि फिल्म 'देवरु कन्ना' (1977) का गीत 'देवरु कन्ना' उनके द्वारा गाए गए सबसे कठिन गीतों में से एक था।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
एस. जानकी का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज़ और गीत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। उनके प्रशंसक उन्हें हमेशा याद करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- एस. जानकी का निधन कब और कहाँ हुआ? एस. जानकी का निधन 11 जुलाई 2026 को मैसूर में 88 वर्ष की आयु में हुआ।
- एस. जानकी को किस नाम से जाना जाता था? उन्हें 'दक्षिण भारतीय संगीत की रानी' और 'मेलोडी क्वीन' कहा जाता था।
- एस. जानकी के कुछ प्रसिद्ध गीत कौन से हैं? उनके प्रसिद्ध गीतों में 'बन्नदा गेलेयारु', 'हुडुगी बेकु', 'यारे नीन्ना चेलुवे', 'बेल्ली मोडागालु', 'अम्मा एंदरे', 'होसा बेलाकु', 'अमरा मधुरा प्रेमा', 'हाडु हाडु', 'मुंगारु माले', 'मोडाला मले', 'बारे बारे', 'निन्ना ताना', 'देवरु कन्ना', 'बा बा नन्ना प्रीतिया', 'कन्ना कन्ना', 'बन्नी बन्नी' शामिल हैं।