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कांगड़ा में गलघोंटू रोग से बचाव के लिए पशु टीकाकरण अभियान शुरू

अभियान की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पशुपालन विभाग ने गलघोंटू रोग (डिप्थीरिया) से पशुओं को बचाने के लिए एक व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया है। यह अभियान 11 जुलाई 2026 से प्रारंभ…

अभियान की शुरुआत

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पशुपालन विभाग ने गलघोंटू रोग (डिप्थीरिया) से पशुओं को बचाने के लिए एक व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया है। यह अभियान 11 जुलाई 2026 से प्रारंभ हुआ है और इस वर्ष डेढ़ लाख पशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान की शुरुआत इंदौरा, फतेहपुर, नूरपुर और नगरोटा सूरियां क्षेत्रों से हुई है।

विशेष फोकस: सीमावर्ती और पौंग बांध क्षेत्र

विभाग ने सीमावर्ती क्षेत्रों और विशेष रूप से पौंग बांध से सटे इलाकों में शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं, ताकि इस घातक बीमारी से पशुधन को सुरक्षित किया जा सके।

रोग के लक्षण और खतरा

गलघोंटू रोग की चपेट में आने पर पशुओं को तेज बुखार, गले में सूजन और सांस लेने में तकलीफ होती है। यदि समय पर उपचार नहीं मिलता, तो 24 घंटे के भीतर पशु की मृत्यु हो सकती है। यह रोग अत्यधिक संक्रामक है और पशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

विभाग की तैयारी और निर्देश

पशुपालन विभाग की उपनिदेशक सीमा गुलेरिया ने बताया कि रोकथाम के लिए छह माह से अधिक आयु के सभी पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लक्षण दिखाई देने के 24 घंटे के भीतर पशु की मौत हो सकती है, इसलिए पशुपालकों को सतर्क रहना चाहिए और अपने पशुओं का अनिवार्य रूप से टीकाकरण करवाना चाहिए।

पशुपालकों से अपील

पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं को नजदीकी टीकाकरण शिविर में ले जाएं या विभागीय टीमों का सहयोग करें। टीकाकरण पूरी तरह से निःशुल्क है और इससे पशुओं को गलघोंटू रोग से बचाया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • गलघोंटू रोग के लक्षण क्या हैं? तेज बुखार, गले में सूजन, सांस लेने में तकलीफ।
  • टीकाकरण अभियान में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है? इंदौरा, फतेहपुर, नूरपुर, नगरोटा सूरियां, सीमावर्ती क्षेत्र और पौंग बांध के आसपास के इलाके।
  • कितने पशुओं का टीकाकरण लक्ष्य है? डेढ़ लाख पशु।
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