मुख्य तथ्य
कांगड़ा जिले के जवाली क्षेत्र के खब्बल हार गांव में स्थित श्री मणि महेश गोशाला में करीब 300 बेसहारा पशुओं का जीवन खक्कोड़ खड्ड पर पुल न होने के कारण संकट में है। बरसात के मौसम में खड्ड में पानी का तेज बहाव होने से पशु चिकित्सकों और स्टाफ को जान जोखिम में डालकर खड्ड पार करनी पड़ रही है।
विस्तार से जानकारी
गोशाला कमेटी के सदस्यों रामनाथ शर्मा, नरेंद्र पिंकी, अवतार सिंह, पवन जट्ट और उषा देवी ने बताया कि चार दिन पहले बीमार पशुओं के लिए बुलाई गई 1962 मोबाइल वेटनरी एंबुलेंस खड्ड में पानी होने के कारण बिना इलाज किए लौट गई। बुधवार को भी फार्मासिस्ट को जोखिम उठाकर खड्ड पार करनी पड़ी। कमेटी ने बताया कि पिछले एक वर्ष से जिला प्रशासन और कृषि मंत्री चंद्र कुमार को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रभाव
- बरसात में पशुओं को समय पर चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल पा रही।
- चारा और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति बाधित हो रही है।
- गोशाला कर्मियों और डॉक्टरों की सुरक्षा खतरे में है।
प्रशासन का रुख
कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि एस्टीमेट तैयार कर पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। गोशाला कमेटी ने शीघ्र पुल निर्माण की मांग की है ताकि पशुओं को राहत मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोशाला में कितने पशु हैं?
श्री मणि महेश गोशाला में लगभग 300 बेसहारा पशु हैं।
खड्ड पर पुल न होने से क्या समस्या हो रही है?
बरसात में खड्ड में पानी बढ़ने पर डॉक्टर और स्टाफ को जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ता है, जिससे पशुओं को समय पर चिकित्सा नहीं मिल पाती।
प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए क्या कहा?
कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि एस्टीमेट तैयार कर पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।