प्रमुख तथ्य
धर्मशाला की विशेष अदालत (पॉक्सो) ने एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी मनीष कुमार को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले का विवरण
पुलिस थाना देहरा में अगस्त 2024 में दर्ज मामले के अनुसार, दोषी मनीष कुमार (निवासी गांव अंगारी, जिला भागलपुर, बिहार) 22 जुलाई 2024 को अपने परिवार के साथ क्षेत्र में मजदूरी करने आया था। इस दौरान उसकी मुलाकात 16 वर्षीय पीड़िता से हुई। आरोपी ने शादी का झांसा देकर 20 अगस्त 2024 को उसे दिल्ली ले गया, जहां से दोनों जयपुर चले गए। करीब सात-आठ दिनों तक जयपुर में रहने के दौरान आरोपी ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी पीड़िता को देहरा छोड़कर फरार हो गया। पीड़िता के 25 अगस्त 2024 को लापता होने पर परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अदालती कार्यवाही और सजा
मामले की सुनवाई विशेष अदालत (पॉक्सो) एवं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने पैरवी की और 28 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी मनीष कुमार को पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत चार वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत तीन वर्ष का कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
प्रभाव और सीख
यह फैसला नाबालिगों के यौन शोषण के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का उदाहरण है। अदालत ने त्वरित सुनवाई और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर दोषी को सजा सुनाई, जो पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मामले से यह संदेश जाता है कि नाबालिगों से छेड़छाड़ या दुष्कर्म करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दोषी को कितने साल की सजा हुई?
दोषी मनीष कुमार को पॉक्सो अधिनियम के तहत चार साल और भारतीय न्याय संहिता के तहत तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है, जो साथ-साथ चलेंगी।
पीड़िता की उम्र कितनी थी?
पीड़िता 16 वर्ष की नाबालिग थी।
यह घटना कहां हुई थी?
यह मामला कांगड़ा जिले के देहरा थाना क्षेत्र का है। आरोपी पीड़िता को दिल्ली और जयपुर ले गया था।