मुख्य तथ्य
तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में स्थित अरुलमिगु एकम्बरनाथ मंदिर का भव्य स्वर्ण रथ रविवार शाम को राजा वीधि और माडा सड़कों से होते हुए शोभायात्रा में निकाला गया। यह रथ 25 फुट ऊंचा, 13 फुट लंबा और 10 फुट चौड़ा है, जो इसे देश के सबसे बड़े स्वर्ण रथों में से एक बनाता है।
विवरण
इस स्वर्ण रथ पर भगवान एकम्बरनाथ और देवी एलावरकुझालियम्मन की मूर्तियां विराजमान हैं। इसे शंकर मठ के पोंटिफ श्री विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य स्वामीगल ने पिछले दिसंबर में मंदिर के कुंभाभिषेक के दौरान समर्पित किया था। आमतौर पर स्वर्ण या रजत रथ बहुत ऊंचे नहीं होते और केवल मंदिरों के अंदर ही शोभायात्रा में निकाले जाते हैं।
इस रथ की अवधारणा श्री जयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य स्वामीगल ने की थी, जिन्होंने इसके निर्माण और स्वर्ण संग्रह की शुरुआत का आशीर्वाद दिया था। श्री विजयेन्द्र सरस्वती स्वामीगल रविवार को प्रदोष के अवसर पर इस शोभायात्रा के दौरान उपस्थित रहे और उन्होंने रथ का शुभारंभ सुनिश्चित किया।
कार्यक्रम की विशेषताएं
इस अवसर पर तमिलनाडु सरकार के मंत्री एस. रमेश, आर.वी. रंजीतकुमार और एस.पी.के. तेन्नारसु भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान 108 नादस्वरम और तविल विद्वानों द्वारा प्रस्तुति, कैलाश वाद्यम, तथा वेद मंत्रों और श्लोकों का पाठ किया गया।
प्रभाव और महत्व
यह स्वर्ण रथ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कांचीपुरम की सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाता है। इसके निर्माण से मंदिर की गरिमा बढ़ी है और यह श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
- यह रथ देश के सबसे बड़े स्वर्ण रथों में से एक है।
- इसे केवल विशेष अवसरों पर ही शोभायात्रा में निकाला जाता है।
- मंदिर कांचीपुरम शहर में स्थित है, जो तमिलनाडु का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकम्बरनाथ मंदिर का स्वर्ण रथ कितना ऊंचा है?
यह रथ 25 फुट ऊंचा, 13 फुट लंबा और 10 फुट चौड़ा है।
इस स्वर्ण रथ को किसने समर्पित किया?
इसे शंकर मठ के पोंटिफ श्री विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य स्वामीगल ने पिछले दिसंबर में मंदिर के कुंभाभिषेक के अवसर पर समर्पित किया था।
शोभायात्रा कब निकाली गई?
शोभायात्रा रविवार शाम को प्रदोष के अवसर पर निकाली गई।