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कामिकाज़ ड्रोन: ईरान ने दिखाया रास्ता, अब भारत बना रहा अपना आर्सेनल

मुख्य तथ्य भारतीय सेना ने हाल ही में 106 Agniveg टर्बोजेट-संचालित कामिकाज़ ड्रोन शामिल किए हैं। वहीं, भारतीय वायुसेना भी इसी तरह के हथियारों के स्वदेशी उत्पादन की ओर बढ़ रही है। ये कदम लॉयटरिंग…

मुख्य तथ्य

भारतीय सेना ने हाल ही में 106 Agniveg टर्बोजेट-संचालित कामिकाज़ ड्रोन शामिल किए हैं। वहीं, भारतीय वायुसेना भी इसी तरह के हथियारों के स्वदेशी उत्पादन की ओर बढ़ रही है। ये कदम लॉयटरिंग मुनिशन पर बढ़ते ध्यान को दर्शाते हैं, जो सस्ते और सटीक मानवरहित हवाई वाहन (UAV) हैं और जिन्होंने आधुनिक युद्ध का स्वरूप बदल दिया है।

क्या हैं कामिकाज़ ड्रोन?

कामिकाज़ शब्द द्वितीय विश्व युद्ध से आया है, जब जापानी पायलट अपने विमानों को सीधे मित्र देशों के जहाजों पर गिराते थे। आज, कामिकाज़ ड्रोन उन मानवरहित ड्रोनों को कहा जाता है जो लक्ष्य की पहचान कर उससे टकराकर नष्ट हो जाते हैं।

भारत के रक्षा उत्पादन विभाग के अनुसार, इन ड्रोनों के दो सामरिक लाभ हैं: तेज़ प्रतिक्रिया क्षमता और कम लागत। ये ड्रोन पूर्व-प्रोग्राम किए जा सकते हैं, लेकिन मिशन के दौरान हमले को बदला या रद्द भी किया जा सकता है। झुंड में छोड़े जाने पर ये दुश्मन की सुरक्षा को बेअसर कर सकते हैं।

ईरान का Shahed और अमेरिका का LUCAS

ईरान द्वारा डिज़ाइन किया गया Shahed-136 ड्रोन, जिसकी लागत लगभग $20,000 है, ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों में अहम भूमिका निभाई। इसके मुकाबले, अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल की एक यूनिट की कीमत लगभग $4 मिलियन है। इस असमानता को देखते हुए अमेरिका ने 2025 में LUCAS (Low-Cost Unmanned Combat Attack System) विकसित किया, जिसकी प्रति यूनिट लागत लगभग $35,000 है।

यूक्रेन-रूस युद्ध में कामिकाज़ ड्रोन

रूस ने Shahed ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। यूक्रेन ने जवाब में अपने सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित किए और फाइबर-ऑप्टिक केबल व नेट जैसे उपायों से बचाव किया। यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने बताया कि अमेरिकी पेंटागन ने ईरानी ड्रोन तकनीक का मुकाबला करने में मदद मांगी थी।

भारत का Agniveg ड्रोन

भारत का Agniveg (Jet Based Peacekeeper) स्वदेशी कंपनी SMPP द्वारा निर्मित है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में छोटी शक्तियां भी अपने छोटे लेकिन खतरनाक हथियारों से भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। Agniveg की रेंज 180 किलोमीटर है और यह दुश्मन के गहरे लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।

FAQ

कामिकाज़ ड्रोन क्या होते हैं?

कामिकाज़ ड्रोन, जिन्हें लॉयटरिंग मुनिशन भी कहा जाता है, ऐसे मानवरहित हवाई वाहन हैं जो लक्ष्य की पहचान कर उससे टकराकर या उसे नष्ट करके खुद भी नष्ट हो जाते हैं। ये सस्ते और सटीक होते हैं।

भारत का Agniveg ड्रोन क्या है?

Agniveg (Jet Based Peacekeeper) भारतीय कंपनी SMPP द्वारा निर्मित एक टर्बोजेट इंजन वाला कामिकाज़ ड्रोन है। इसकी ऑपरेशनल रेंज 180 किलोमीटर है और इसे दुश्मन के इलाके में गहरे लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

कामिकाज़ ड्रोन का युद्ध में क्या महत्व है?

ये ड्रोन तेज़, सस्ते और लचीले होते हैं। इन्हें झुंड में छोड़ा जा सकता है, जिससे दुश्मन की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा जाती है। रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका संघर्ष में इनकी कारगरता देखी गई है।

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