मुख्य तथ्य
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था शुक्रवार सुबह उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होते हुए तिब्बत में प्रवेश कर गया। यह जत्था 48 श्रद्धालुओं, एक डॉक्टर और चार सहायक कर्मचारियों से बना था। कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों ने 17,500 फीट ऊंचे लिपुलेख दर्रे को सुबह 9:05 बजे पार किया।
यात्रा का विवरण
धारचूला बेस कैंप के प्रभारी अधिकारी धन सिंह बिष्ट ने बताया कि पहले जत्थे में मूल रूप से 49 श्रद्धालु थे, लेकिन एक व्यक्ति व्यक्तिगत कारणों से गुंजी कैंप से वापस लौट गया। शेष 48 श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा जारी रखी। दूसरे जत्थे में 47 सदस्य हैं, जिनकी यात्रा लखनपुर में भूस्खलन के कारण विलंबित हुई। अधिकारियों के अनुसार, यह जत्था शुक्रवार शाम तक गुंजी कैंप पहुंच जाएगा और शनिवार सुबह आगे बढ़ेगा।
यात्रा का महत्व और प्रभाव
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह यात्रा उत्तराखंड के धारचूला से शुरू होकर लिपुलेख दर्रे के रास्ते तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक जाती है। इस वर्ष की यात्रा में सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। पहले जत्थे के साथ एक डॉक्टर और चार सहायक कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
- यात्रा मार्ग: धारचूला बेस कैंप → गुंजी कैंप → लिपुलेख दर्रा → तिब्बत
- लिपुलेख दर्रे की ऊंचाई: 17,500 फीट
- पहला जत्था: 48 श्रद्धालु + 1 डॉक्टर + 4 सहायक कर्मचारी
- दूसरा जत्था: 47 सदस्य (भूस्खलन के कारण विलंबित)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले जत्थे में कितने श्रद्धालु थे?
पहले जत्थे में 48 श्रद्धालु, एक डॉक्टर और चार सहायक कर्मचारी शामिल थे।
यात्रा का मार्ग क्या है?
यात्री धारचूला बेस कैंप से गुंजी कैंप होते हुए लिपुलेख दर्रे (17,500 फीट) को पार कर तिब्बत प्रवेश करते हैं।
दूसरे जत्थे में कितने सदस्य हैं और देरी क्यों हुई?
दूसरे जत्थे में 47 सदस्य हैं। लखनपुर में भूस्खलन के कारण उनकी यात्रा में देरी हुई।