प्राध्यापकों का विरोध प्रदर्शन
जोगिंद्रनगर (मंडी) के राजकीय महाविद्यालय में मंगलवार को प्राध्यापकों ने लंबित पदोन्नतियों के खिलाफ काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। प्राध्यापकों ने सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पांच वर्षों से लंबित पदोन्नतियां
प्रदर्शन में शामिल प्राध्यापिका दीप्ति कटोच और डॉ. सरवण ने बताया कि पिछले करीब पांच वर्षों से उनकी पदोन्नतियां लंबित हैं, जबकि प्रदेश सरकार के अन्य विभागों में नियमित रूप से पदोन्नति प्रक्रिया जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे पूरे प्राध्यापक वर्ग में निराशा का माहौल है।
प्रमुख मांगें
- कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) को तत्काल लागू किया जाए।
- विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया बिना देरी शुरू की जाए।
- लंबित पदोन्नतियों का निपटारा जल्द से जल्द किया जाए।
उच्च शिक्षा पर प्रभाव
प्राध्यापकों ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नतियां लंबित रहने से न केवल उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
FAQ
प्राध्यापकों ने विरोध क्यों किया?
पिछले पांच वर्षों से उनकी पदोन्नतियां लंबित हैं, जिसके खिलाफ उन्होंने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में कौन शामिल थे?
प्राध्यापिका दीप्ति कटोच और डॉ. सरवण सहित कई प्राध्यापक शामिल हुए।
प्राध्यापकों ने क्या चेतावनी दी?
यदि पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
प्रदर्शन का उच्च शिक्षा पर क्या प्रभाव बताया गया?
लंबित पदोन्नतियों से प्राध्यापकों का मनोबल गिरा है और उच्च शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।