मुख्य तथ्य
मंडी जिले के गोहर उपमंडल की कमरुघाटी में स्थित प्रसिद्ध जालपा माता सरोआ के वार्षिक मेले का 10 जुलाई 2026 को भव्य समापन हुआ। तेज बारिश के बावजूद नाचन, सिराज, बल्ह, करसोग, मंडी और सुंदरनगर सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु माता के दर्शन को पहुंचे।
पांच देवताओं का दिव्य मिलन
मेले का मुख्य आकर्षण पांच देवी-देवताओं के रथों का पारंपरिक मिलन रहा। इनमें माता जालपा, देव चाहडू, माता चतर्भुजा, देवी दुलाशन और देव बाला टिका जबाल के रथ शामिल थे। धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ हुए इस दिव्य मिलन के दौरान देव नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और विशेष अनुष्ठानों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालुओं की आस्था
बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। देवता कमेटी के प्रधान लीला प्रकाश ठाकुर ने बताया, 'परंपरा के अनुसार माता ने हारों की रक्षा बांधी और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।' देवता के गूर बिंदर कुमार ने कहा, 'सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न हुए।'
मेले का महत्व
जालपा माता सरोआ का यह वार्षिक मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक साथ लाने का माध्यम भी है। मेले में स्थानीय देवी-देवताओं के मिलन को शुभ संकेत माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जालपा माता मेला कहाँ लगता है?
यह मेला मंडी जिले के गोहर क्षेत्र की कमरुघाटी में जालपा माता सरोआ में लगता है।
मेले में किन देवी-देवताओं के रथ शामिल हुए?
माता जालपा, देव चाहडू, माता चतर्भुजा, देवी दुलाशन और देव बाला टिका जबाल के रथ शामिल हुए।
मेले का मुख्य आकर्षण क्या रहा?
पांच देवी-देवताओं के रथों का पारंपरिक मिलन और देव नृत्य मुख्य आकर्षण रहे।