Himachal | Creation Myth

जैंतिया सृष्टि मिथक: जब धरती हिलती है तो पूर्वजों का आह्वान ‘खाई-सान खाई-हेह’ गूंजता है

परिचय जब भी जैंतिया पहाड़ियों में धरती कांपती है, एक प्राचीन आवाज गूंजती है: ‘खाई-सान खाई-हेह’ – जागो, बुजुर्गो, जागो। यह पुकार केवल भूकंप का जवाब नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक स्मृति है कि धरती…

परिचय

जब भी जैंतिया पहाड़ियों में धरती कांपती है, एक प्राचीन आवाज गूंजती है: 'खाई-सान खाई-हेह' – जागो, बुजुर्गो, जागो। यह पुकार केवल भूकंप का जवाब नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक स्मृति है कि धरती के नीचे एक कहानी, एक इतिहास और पूर्वजों से पवित्र संबंध छिपा है।

जैंतिया सृष्टि मिथक: दो परम

जैंतिया मौखिक परंपरा में दो महत्वपूर्ण 'परम' (पारंपरिक आख्यान) हैं जो मानव अस्तित्व के लिए धरती के निर्माण और तैयारी का वर्णन करते हैं। दोनों में जोर अलग है, लेकिन दोनों बताते हैं कि दुनिया एक बार अधूरी थी और मानव जीवन के लिए उसे बदलना पड़ा।

पहला परम: धरती की उर्वरता

पहले परम के अनुसार, जब नियाव वासा पहली बार 'का तांगनूब तांगजरी' से उतरे, तो उन्हें केवल चट्टानें, पानी और हवा मिली। कोई उपजाऊ मिट्टी नहीं थी, कोई मजबूत जमीन नहीं थी। लोग बस्तियां बसाने में असफल रहे। पनार कहावत है: 'चना युंग इ स्टेप पाट इ मिएट, चना युंग इ मिएट पाट इ स्टेप' (दिन में घर बनाओ, रात को गिर जाए; रात में बनाओ, दिन को गिर जाए)। यह दर्शाता है कि धरती अभी मानव निवास के लिए तैयार नहीं थी।

लोगों ने यू सिएम लाकरिया से मध्यस्थता की प्रार्थना की, जो सृष्टिकर्ता यू ट्रे किरोट तक उनकी पुकार ले गए। सृष्टिकर्ता ने पृथ्वी माता का बेई रीमाव को बुलाकर पवित्र मिट्टी 'का ले खोह ले सुन' प्रदान की, जिससे बंजर धरती उपजाऊ बन गई।

दूसरा परम: भूदृश्य का निर्माण

दूसरा परम कहानी को विस्तार देता है। इसमें जैंतिया पहाड़ियां एक विशाल दलदली क्षेत्र थीं, जहां बड़ी झीलें थीं। जमीन अस्थिर थी, घर गिर जाते थे। लोगों ने फिर यू ट्रे किरोट की शरण ली। इस बार सृष्टिकर्ता ने यू सिएम पिरथाट (गर्जन) और यू खमी (भूकंप) को आदेश दिया कि वे भूमि को नया रूप दें। प्राचीन दलदल का पानी दक्षिणी समुद्र की ओर बह गया, जबकि उत्तर में लूम माकाचियांग (हिमालय क्षेत्र से जुड़ा) का उदय हुआ। इस घटना को जैंतिया जलप्रलय कहा जाता है, जिसने लोगों को विभिन्न दिशाओं में बिखेर दिया।

इसी तरह के भूकंपीय क्षणों में पूर्वजों का आह्वान 'खाई-सान खाई-हेह' किया जाता है, जो धरती, मानवता और पूर्वजों के बीच निरंतर संबंध को दर्शाता है।

वैज्ञानिक समानताएं

दूसरा परम आधुनिक भूविज्ञान से तुलना को आमंत्रित करता है। आज विज्ञान बताता है कि महाद्वीप हिलते हैं, महासागर बदलते हैं, और पहाड़ उठते हैं। भारतीय प्लेट के उत्तर की ओर बढ़ने और यूरेशियन प्लेट से टकराने से हिमालय का निर्माण हुआ। जैंतिया परम इन परिवर्तनों को पवित्र शक्तियों – गर्जन, भूकंप, जल और दैवीय क्रिया – के माध्यम से वर्णित करता है। यह वैज्ञानिक स्पष्टीकरण नहीं, बल्कि बदलती धरती की एक स्वदेशी स्मृति है।

दोनों परमों का एकीकृत संदेश

दोनों परम प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सृष्टि के दो चरण हैं। पहला धरती को मानव जीवन के लिए तैयार करने पर केंद्रित है – उपजाऊ मिट्टी और स्थिर जमीन का आगमन। दूसरा भूदृश्य के निर्माण – जल की गति, पर्वतों का उदय – का वर्णन करता है। साथ मिलकर वे एक अधूरी धरती से जीवंत दुनिया तक की यात्रा बताते हैं।

धरती तैयार होने के बाद, यू ट्रे किरोट ने उर्वरता की देवी का बेई वाबूह को बुलाकर जीवन से भर दिया। जंगल, नदियां, पक्षी, जानवर और मछलियां प्रकट हुईं। पत्थर के देवता 'की सोदवार सूलुति' ने भूमि की मजबूती का प्रतीक बनाया, जबकि नदी देवता 'की तावियार ताकान' ने जल के जीवनदायी गुण को दर्शाया।

निष्कर्ष

जैंतिया सृष्टि मिथक हमें याद दिलाता है कि धरती केवल मानव निवास स्थान नहीं, बल्कि एक पवित्र रचना है, जो अनगिनत शक्तियों द्वारा आकारित हुई है। जब भी जमीन कांपती है और लोग 'खाई-सान खाई-हेह' पुकारते हैं, वे न केवल भूकंप को याद करते हैं, बल्कि उस प्राचीन कहानी को भी याद करते हैं कि कैसे धरती मानवता का घर बनी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैंतिया सृष्टि मिथक में 'खाई-सान खाई-हेह' का क्या अर्थ है?

यह पूर्वजों को जगाने का आह्वान है, जो भूकंप के समय किया जाता है। इसका अर्थ है 'जागो, बुजुर्गो, जागो'। यह धरती और मानवता के बीच संबंध को दर्शाता है।

जैंतिया परंपरा में दो परम किस बारे में हैं?

पहला परम धरती को उपजाऊ बनाने और मानव बस्तियों के लिए तैयार करने के बारे में है। दूसरा परम भूदृश्य के निर्माण, जल निकासी और पहाड़ों के उदय का वर्णन करता है।

क्या जैंतिया सृष्टि मिथक का वैज्ञानिक आधार है?

हाँ, दूसरा परम प्लेट टेक्टोनिक्स और हिमालय निर्माण जैसी भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं से मेल खाता है, हालाँकि इसे दैवीय शक्तियों के रूप में वर्णित किया गया है।

Follow us on Google News

Explore more

(BBMB) has released official notification Advertisement No. 01/2026 for the recruitment of 71 ITI, Diploma, and Graduate Apprentice posts

“`html BBMB Apprentice Recruitment 2026: Apply Online For 71 ITI, Diploma & Graduate Posts Bhakra Beas Management Board (BBMB) has officially published…

More on Himachal from Himachal Pradesh

ऊना: रामपुर बेली ब्रिज पर टूटा एंगल, विभाग की लापरवाही से बढ़ रहा हादसों का खतरा

प्रमुख तथ्य ऊना जिले के रामपुर बेली ब्रिज पर बड़े वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए लगाया गया लोहे का एंगल कई…

सुंदरनगर में पेयजल आपूर्ति हुई प्रभावित, अब दिन में सिर्फ एक बार मिलेगा पानी

प्रमुख तथ्य सुंदरनगर (मंडी) में लगातार बारिश के कारण पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। जल शक्ति विभाग ने शहरवासियों के…

Una News: शराब की अवैध तस्करी पर लगाम के लिए संयुक्त अभियान शुरू

Key Facts Una Police, led by Superintendent of Police Sachin Hiremath, held a joint meeting with licensed liquor traders and officials from…