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राजस्थान में जन्मे भौतिक विज्ञानी जैनेंद्र के जैन को मिला वुल्फ पुरस्कार

प्रमुख तथ्य राजस्थान में जन्मे सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जैनेंद्र के जैन को भौतिकी में प्रतिष्ठित वुल्फ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय हैं। यह पुरस्कार उन्हें 18…

प्रमुख तथ्य

राजस्थान में जन्मे सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जैनेंद्र के जैन को भौतिकी में प्रतिष्ठित वुल्फ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय हैं। यह पुरस्कार उन्हें 18 जून को इज़राइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग द्वारा नेसेट में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।

खोज और उपलब्धियां

जैन ने 1989 में येल विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टरल शोध के दौरान कम्पोजिट फर्मियन की खोज की। यह खोज आधुनिक संघनित पदार्थ भौतिकी का एक केंद्रीय सिद्धांत बन गई। उन्होंने 250 से अधिक वैज्ञानिक लेख और 'कम्पोजिट फर्मियन' नामक पुस्तक लिखी है। उन्हें अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी का ओलिवर ई. बकले पुरस्कार, आईआईटी कानपुर का विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार और अमेरिकी राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज तथा भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की सदस्यता मिल चुकी है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

जैन का जन्म राजस्थान के सांभर में हुआ, जो थार रेगिस्तान के किनारे बसा एक छोटा शहर है। बचपन में उन्होंने एक पत्रिका में भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच संवाद पढ़ा, जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। 12 वर्ष की आयु में कोलकाता में एक कार दुर्घटना में उनकी मां की मृत्यु हो गई और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। डॉ. पी.के. सेठी और शिल्पकार राम चंद्र शर्मा द्वारा विकसित जयपुर फुट ने उन्हें फिर से चलने में मदद की। उन्होंने जयपुर के महाराजा कॉलेज से स्नातक, आईआईटी कानपुर से परास्नातक और न्यूयॉर्क के स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय से पीएचडी की। 1981 में 21 वर्ष की आयु में वे पहली बार अमेरिका गए।

भारत से जुड़ाव

जैन लोधा सैद्धांतिक भौतिकी संस्थान (LTPI) के संस्थापक निदेशक हैं, जो भारत का पहला पूर्णतः निजी वित्त पोषित सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान केंद्र है। उनका लक्ष्य युवा वैज्ञानिकों को महत्वाकांक्षी विचारों को आगे बढ़ाने और दुनिया भर के शोधकर्ताओं के साथ सहयोग करने का वातावरण प्रदान करना है।

प्रभाव और महत्व

वुल्फ पुरस्कार को भौतिकी में सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। इसके 27 पूर्व विजेताओं ने बाद में नोबेल पुरस्कार जीता है। जैन की उपलब्धि न केवल भारत बल्कि पूरे विज्ञान जगत के लिए गर्व का विषय है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • जैनेंद्र के जैन को वुल्फ पुरस्कार क्यों मिला? उन्हें कम्पोजिट फर्मियन की खोज के लिए वुल्फ पुरस्कार मिला, जिसने क्वांटम पदार्थ की समझ को बदल दिया।
  • वुल्फ पुरस्कार कितना प्रतिष्ठित है? यह भौतिकी के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है। इसके 27 पूर्व विजेता बाद में नोबेल पुरस्कार जीत चुके हैं।
  • जैनेंद्र के जैन का भारत से क्या संबंध है? वे राजस्थान के सांभर में पले-बढ़े और जयपुर के महाराजा कॉलेज तथा आईआईटी कानपुर में पढ़े। वे लोधा सैद्धांतिक भौतिकी संस्थान के संस्थापक निदेशक हैं।

स्रोत: www.hindustantimes.com

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