Desh Duniya | इंदिरा लंकेश

इंदिरा लंकेश का निधन: कन्नड़ साहित्य और पत्रकारिता की मजबूत स्तंभ 83 वर्ष की आयु में निधन

प्रमुख तथ्य इंदिरा लंकेश, जिनका जीवन कन्नड़ साहित्य और पत्रकारिता के केंद्र में रहा, का 16 जून 2026 को बेंगलुरु में निधन हो गया। वह 83 वर्ष की थीं। उन्होंने एक सफल उद्यमी, लेखिका और…

प्रमुख तथ्य

इंदिरा लंकेश, जिनका जीवन कन्नड़ साहित्य और पत्रकारिता के केंद्र में रहा, का 16 जून 2026 को बेंगलुरु में निधन हो गया। वह 83 वर्ष की थीं। उन्होंने एक सफल उद्यमी, लेखिका और प्रकाशक के रूप में अपनी पहचान बनाई। वह पी. लंकेश की पत्नी और गौरी लंकेश की मां थीं।

जीवन परिचय

इंदिरा लंकेश का जन्म 2 जून 1943 को शिवमोग्गा में हुआ था। उन्होंने 1960 में लेखक और पत्रकार पी. लंकेश से विवाह किया। बेंगलुरु में बसने के बाद, जब पी. लंकेश ने विश्वविद्यालय में अपनी नौकरी छोड़कर फिल्म निर्माण और रंगमंच में कदम रखा, तो परिवार की आर्थिक स्थिति अनिश्चित हो गई। इस चुनौती का सामना करते हुए, इंदिरा लंकेश ने घर से साड़ियाँ बेचना शुरू किया और 1979 में गांधी बाजार में मयूर सिल्क्स एंड टेक्सटाइल्स खोला। यह व्यवसाय परिवार की आय का मुख्य स्रोत बना।

साहित्यिक और प्रकाशन योगदान

1980 में पी. लंकेश ने लंकेश पत्रिका की स्थापना की, जो कन्नड़ मीडिया में एक विशिष्ट स्थान रखती है। जहाँ पी. लंकेश इसके सार्वजनिक चेहरे थे, वहीं इंदिरा लंकेश इसके प्रशासन, विकास और प्रकाशन कार्यों में गहराई से शामिल रहीं। उन्होंने पुस्तक प्रकाशन में भी सक्रिय भूमिका निभाई और लेखन जारी रखा। उनकी साहित्यिक कृति 'हुलिमावु मट्टू नानु' एक आत्मकथात्मक रचना है, जो गौरी लंकेश पत्रिका में धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुई थी। यह पी. लंकेश की आत्मकथा 'हुलिमाविना मारा' के समानांतर है और कन्नड़ में महिलाओं द्वारा लिखित आत्मकथाओं में एक मील का पत्थर मानी जाती है।

श्रद्धांजलियाँ

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, "पी. लंकेश की साहित्य, मीडिया और सिनेमा में उपलब्धियाँ इंदिरा लंकेश के अटूट समर्थन और योगदान के बिना संभव नहीं होतीं।" उन्होंने यह भी कहा कि गौरी लंकेश की हत्या के बाद इंदिरा लंकेश गहरे सदमे में थीं और कभी पूरी तरह से उबर नहीं पाईं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें "सभी महिलाओं के लिए आदर्श" और "अटूट दृढ़ संकल्प और लचीलापन" रखने वाली बताया। मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार तीस्ता सीतलवाड़ ने लिखा, "रेस्ट इन पावर एंड पीस, इंदिराम्मा। गौरी के लिए न्याय होगा। हम वादा करते हैं।"

प्रभाव और विरासत

इंदिरा लंकेश का जीवन कन्नड़ साहित्य और पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने एक ऐसे परिवार की नींव रखी जिसने साहित्य, मीडिया और सार्वजनिक बहस को गहराई से प्रभावित किया। उनकी विरासत उनकी बेटी कविता लंकेश (फिल्म निर्माता) और बेटे इंद्रजीत लंकेश (फिल्म निर्माता और अभिनेता) के माध्यम से जारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • इंदिरा लंकेश कौन थीं? इंदिरा लंकेश एक प्रसिद्ध लेखिका, प्रकाशक और उद्यमी थीं, जिन्होंने कन्नड़ साहित्य और पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह पी. लंकेश की पत्नी और गौरी लंकेश की मां थीं।
  • इंदिरा लंकेश का निधन कब और कहाँ हुआ? उनका निधन 16 जून 2026 को बेंगलुरु स्थित उनके आवास पर हुआ। वह 83 वर्ष की थीं।
  • इंदिरा लंकेश की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या थीं? उन्होंने मयूर सिल्क्स एंड टेक्सटाइल्स की स्थापना की, लंकेश पत्रिका के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और 'हुलिमावु मट्टू नानु' जैसी आत्मकथात्मक रचना लिखी।
  • गौरी लंकेश की हत्या का इंदिरा लंकेश पर क्या प्रभाव पड़ा? गौरी लंकेश की 2017 में हत्या के बाद इंदिरा लंकेश गहरे सदमे में थीं और कभी पूरी तरह से उबर नहीं पाईं।

स्रोत: www.hindustantimes.com

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