प्रमुख तथ्य
भारतीय नाविक निशांत उरिथनाथन (35) की ओमान के दुक्म बंदरगाह पर एमटी सेलेस्टियल जहाज पर चिकित्सीय कारणों से मौत हो गई। यह घटना 11 जून 2026 को हुई। भारतीय दूतावास ने 13 जून को इसकी पुष्टि की।
विस्तार से जानकारी
भारतीय दूतावास के अनुसार, निशांत उरिथनाथन की मौत चिकित्सीय स्थितियों के कारण हुई। दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा, 'शव को जल्द से जल्द उतारने और भारत भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं।' परिवार से संपर्क बनाए रखा गया है।
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने बताया कि शव को दो दिन से अधिक समय तक बिना उचित प्रशीतन के जहाज पर रखा गया। चालक दल ने ठंडे पानी की बोतलों से शव को ठंडा रखने की कोशिश की, जिसे यूनियन ने 'भयावह और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी स्थिति' बताया।
प्रभाव और चिंताएं
भारत में 300,000 से अधिक नाविक वैश्विक शिपिंग बेड़े में काम करते हैं। पश्चिम एशिया में 18,000 से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं। यह घटना उस समय हुई जब अमेरिकी हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी से जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से इस मुद्दे को उठाने की मांग की थी। भारत ने अमेरिकी चार्ज डी'अफेयर्स को तलब कर नागरिक शिपिंग पर घातक बल के इस्तेमाल पर चिंता जताई थी।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह घटना भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कार्य स्थितियों पर सवाल उठाती है। सरकार को विदेशों में कार्यरत नाविकों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन प्रबंधन सुनिश्चित करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय नाविक निशांत उरिथनाथन की मौत कैसे हुई?
चिकित्सीय कारणों से उनकी मौत हुई, जब वे ओमान के दुक्म बंदरगाह पर एमटी सेलेस्टियल जहाज पर तैनात थे।
शव को दो दिन तक जहाज पर क्यों रखा गया?
उचित प्रशीतन की कमी के कारण शव को जहाज पर रखा गया। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ने बताया कि चालक दल ने ठंडे पानी की बोतलों से शव को ठंडा रखने की कोशिश की।
भारत सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
भारतीय दूतावास ने शव को जल्द से जल्द उतारने और भारत भेजने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। परिवार के संपर्क में है।