मुख्य तथ्य
भारत सरकार के स्वामित्व वाली खनन कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) रूसी तेल उत्पादक Rosneft के साथ साइबेरिया के Tomtor दुर्लभ मृदा भंडार से नमूने प्राप्त करने के लिए बातचीत कर रही है। यह कदम चीन पर निर्भरता कम करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
वार्ता का विवरण
एक सूत्र के अनुसार, ये बातचीत सरकारी चैनलों के माध्यम से हो रही है। नमूनों को रूस में प्रसंस्करण के बाद भारत भेजा जाएगा। भारत जमा के खनिज संरचना का अध्ययन करना चाहता है, इसके बाद ही गहन जुड़ाव पर विचार किया जाएगा। IREL, परमाणु ऊर्जा विभाग, विदेश मंत्रालय, खान मंत्रालय और Rosneft ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
Tomtor जमा का महत्व
Tomtor रूस के याकुतिया क्षेत्र में स्थित है और इसे दुनिया के सबसे बड़े अविकसित दुर्लभ मृदा भंडारों में से एक माना जाता है। दुर्लभ मृदा तत्व इलेक्ट्रिक वाहन मोटर, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाने वाले स्थायी चुम्बकों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारत की वैश्विक पहुंच
IREL दुर्लभ मृदा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए वैश्विक स्तर पर सक्रिय है। कंपनी अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और मलावी में खनन के अवसर तलाश रही है, और 2029-2030 तक दुर्लभ मृदा मैग्नेट उत्पादन शुरू करने की योजना बना रही है। भारत ने नवंबर में मैग्नेट निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 73 अरब रुपये ($770.77 मिलियन) के कार्यक्रम को मंजूरी दी थी।
चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश
भारत का लक्ष्य दुर्लभ मृदा के मामले में चीन पर निर्भरता कम करना है। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण यह प्रयास तेज हुआ है। भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा भंडार (लगभग 7.23 मिलियन मीट्रिक टन) होने के बावजूद, वर्तमान में घरेलू स्तर पर दुर्लभ मृदा मैग्नेट का उत्पादन नहीं होता है।
अन्य प्रयास
पिछले साल, भारत ने म्यांमार से दुर्लभ मृदा के नमूने प्राप्त करने के लिए एक विद्रोही समूह की मदद ली थी। IREL जापानी और दक्षिण कोरियाई कंपनियों के साथ भी वाणिज्यिक मैग्नेट निर्माण की योजनाओं पर बातचीत कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Tomtor जमा कहाँ स्थित है और इसका महत्व क्या है?
Tomtor जमा रूस के साइबेरियाई क्षेत्र याकुतिया में स्थित है और इसे दुनिया के सबसे बड़े अविकसित दुर्लभ मृदा भंडारों में से एक माना जाता है।
भारत दुर्लभ मृदा में आत्मनिर्भरता के लिए क्या कदम उठा रहा है?
भारत ने दुर्लभ मृदा मैग्नेट निर्माण के लिए 73 अरब रुपये के कार्यक्रम को मंजूरी दी है और IREL अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, मलावी जैसे देशों में खनन के अवसर तलाश रहा है।
भारत के पास दुर्लभ मृदा का कितना भंडार है?
भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा भंडार है, जो लगभग 7.23 मिलियन मीट्रिक टन अनुमानित है।