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भारत को कठोर गुटबंदी से बचते हुए ‘निर्णायक शक्ति’ बने रहना चाहिए: राजनयिक

मुख्य तथ्य बेंगलुरु में ‘द हिंदू हडल’ कार्यक्रम में यूरोपीय संघ (EU), ऑस्ट्रेलिया और भारत के वरिष्ठ राजनयिकों ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और आर्थिक एकीकरण पर जोर दिया। इस चर्चा में EU राजदूत हर्वे डेलफिन,…

मुख्य तथ्य

बेंगलुरु में 'द हिंदू हडल' कार्यक्रम में यूरोपीय संघ (EU), ऑस्ट्रेलिया और भारत के वरिष्ठ राजनयिकों ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और आर्थिक एकीकरण पर जोर दिया। इस चर्चा में EU राजदूत हर्वे डेलफिन, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन और पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव शामिल थे।

विस्तार से चर्चा

EU राजदूत का दृष्टिकोण

EU राजदूत हर्वे डेलफिन ने 'मध्य शक्तियों' शब्दावली को खारिज करते हुए कहा कि यह देशों को वर्गीकृत करता है। उन्होंने कहा, "हम विरोधाभास और ध्रुवीकरण के युग में हैं, जिसमें पहले से अधिक सहयोग की आवश्यकता है।" उन्होंने EU-भारत रणनीतिक साझेदारी को ऐतिहासिक ऊंचाई पर बताया और भारत की संघर्ष समाधान में भूमिका को सराहा।

ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त का बयान

फिलिप ग्रीन ने कहा कि नियम-आधारित व्यवस्था अभी भी काफी हद तक बरकरार है और व्यापार, शिपिंग, दूरसंचार को नियंत्रित करती है। उन्होंने कहा, "हमें मौजूदा नियमों की रक्षा करनी चाहिए और उन्हें मजबूत करना चाहिए। वैश्विक नियम-निर्माण धीमा हुआ है, लेकिन रुका नहीं है।" उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार में 200% वृद्धि का उल्लेख किया।

निरुपमा राव का दृष्टिकोण

पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि भारत को एक 'निर्णायक शक्ति' के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि कठोर गुटों में शामिल होना चाहिए। उन्होंने भारत की पश्चिम एशिया नीति और फिलिस्तीन के प्रति समर्थन को भी रेखांकित किया।

प्रभाव और निहितार्थ

यह चर्चा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। EU और ऑस्ट्रेलिया के साथ मजबूत संबंध भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखनी चाहिए।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार में भारी वृद्धि से हिमाचल प्रदेश के निर्यातकों को भी लाभ हो सकता है।
  • EU के साथ बढ़ते सहयोग से प्रौद्योगिकी और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
  • नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत को नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में क्या भूमिका निभानी चाहिए?

भारत को एक निर्णायक शक्ति के रूप में कार्य करना चाहिए, कठोर गुटों में शामिल होने के बजाय अपने प्रभाव और संवाद का उपयोग करना चाहिए।

भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार में कितनी वृद्धि हुई है?

पिछले पांच वर्षों में भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 200% बढ़ा है, जबकि वैश्विक निर्यात में 40% की वृद्धि हुई है।

EU भारत के साथ किस प्रकार सहयोग चाहता है?

EU भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना चाहता है और संघर्ष समाधान में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।

स्रोत: www.thehindu.com

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