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भारत को एकीकृत ‘वायु और अंतरिक्ष बल’ की आवश्यकता: वरिष्ठ iaf अधिकारी

मुख्य तथ्य भारतीय वायु सेना (IAF) के वरिष्ठ अधिकारी एयर मार्शल आशीष सिंह ने मंगलवार को एक एकीकृत ‘वायु और अंतरिक्ष बल’ (Air and Space Force) की स्थापना की वकालत की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष…

मुख्य तथ्य

भारतीय वायु सेना (IAF) के वरिष्ठ अधिकारी एयर मार्शल आशीष सिंह ने मंगलवार को एक एकीकृत 'वायु और अंतरिक्ष बल' (Air and Space Force) की स्थापना की वकालत की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष का सैन्यीकरण बढ़ रहा है और इसके हथियारीकरण की संभावना भी बढ़ रही है। भारत को आने वाले अंतरिक्ष युग में प्रासंगिक बने रहने के लिए एक सच्ची एयरोस्पेस शक्ति बनना होगा।

विस्तार से जानकारी

इंडियन स्पेस कांग्रेस 2026 में बोलते हुए एयर मार्शल सिंह ने कहा, "अंतरिक्ष वायु शक्ति को किसी भी अन्य चीज़ से अधिक सक्षम बनाता है, और इसका विपरीत भी सत्य है। जो देश अग्रणी एयरोस्पेस शक्तियाँ हैं (अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस), उनके आने वाले युग में अंतरिक्ष शक्ति बनने की अधिक संभावना है क्योंकि उनके पास मजबूत विमानन आधार है। इसलिए, IAF की क्षमता का विस्तार अंतरिक्ष को शामिल करने के लिए होना चाहिए, और ऐसा एकीकृत 'वायु और अंतरिक्ष बल' हमारे देश को लाभान्वित करेगा।"

वैश्विक परिदृश्य

वर्तमान में, केवल अमेरिका और चीन के पास स्वतंत्र और समर्पित अंतरिक्ष बल हैं, जिन्हें क्रमशः US Space Force और People's Liberation Army Aerospace Force कहा जाता है। कई अन्य देश अपने अंतरिक्ष रक्षा का प्रबंधन मौजूदा वायु सेनाओं में एकीकृत शाखाओं या संयुक्त अंतर-सेवा अंतरिक्ष कमांड के माध्यम से करते हैं।

  • फ्रांस: फ्रांसीसी वायु सेना का नाम बदलकर 2020 में औपचारिक रूप से 'फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल' (French Air and Space Force) कर दिया गया।
  • रूस: रूसी अंतरिक्ष बल 2015 में पुनर्गठन के बाद एकीकृत रूसी एयरोस्पेस बलों में शामिल हो गए।
  • यूके: 2021 में गठित UK Space Command एक संयुक्त इकाई है जो रॉयल नेवी, ब्रिटिश सेना और रॉयल एयर फोर्स से कार्मिक लेती है।
  • जर्मनी: जर्मनी में 2022 में Defence Space Command की स्थापना की गई।

भारत की वर्तमान स्थिति

एक समर्पित अंतरिक्ष शाखा के बजाय, भारत अपने सैन्य अंतरिक्ष संपत्तियों का प्रबंधन रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency) के माध्यम से करता है। यह एक विशेष त्रि-सेवा एजेंसी है जिसे देश की सैन्य अंतरिक्ष युद्ध और उपग्रह खुफिया संपत्तियों के संचालन का कार्य सौंपा गया है। यह भारत की विकसित होती सैन्य अंतरिक्ष सिद्धांत के लिए मूलभूत ढांचे के रूप में कार्य करता है, जिसमें सेना, नौसेना और IAF के कार्मिक शामिल हैं।

अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पर दृष्टिकोण

इंडियन स्पेस कांग्रेस 2026 में बोलते हुए INSPACe के अध्यक्ष पवन के गोयनका ने कहा, "2033 तक 44 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था केवल स्टार्टअप्स द्वारा नहीं बनाई जाएगी। निवेशक अंतरिक्ष को न केवल एक सीमा के रूप में देखते हैं, बल्कि एक दीर्घकालिक औद्योगिक अवसर के रूप में भी देखते हैं जहाँ प्रारंभिक विश्वास स्थायी मूल्य बनाता है।"

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

यह प्रस्ताव भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है, जहाँ अंतरिक्ष को अब एक अलग युद्धक्षेत्र के रूप में मान्यता दी जा रही है। एकीकृत वायु और अंतरिक्ष बल के गठन से भारत की सैन्य क्षमताओं में वृद्धि होगी और वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों के साथ प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

एकीकृत वायु और अंतरिक्ष बल क्या है?

यह एक ऐसा बल है जो वायु सेना और अंतरिक्ष क्षमताओं को एक ही संगठन में समाहित करता है, जैसे फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल।

किन देशों के पास समर्पित अंतरिक्ष बल है?

वर्तमान में केवल अमेरिका (US Space Force) और चीन (People's Liberation Army Aerospace Force) के पास स्वतंत्र अंतरिक्ष बल है।

भारत वर्तमान में अंतरिक्ष रक्षा का प्रबंधन कैसे करता है?

भारत अपने सैन्य अंतरिक्ष संपत्तियों का प्रबंधन रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency) के माध्यम से करता है, जो एक त्रि-सेवा एजेंसी है।

भारत के अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लक्ष्य क्या है?

INSPACe के अध्यक्ष पवन के गोयनका के अनुसार, 2033 तक भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 44 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

Source: timesofindia.indiatimes.com

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