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भारत और जापान ने संयुक्त क्रेडिट तंत्र के कार्यान्वयन को अंतिम रूप दिया

मुख्य तथ्य भारत और जापान ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत संयुक्त क्रेडिट तंत्र (JCM) के कार्यान्वयन के नियमों को अंतिम रूप दे दिया है। यह घोषणा मंगलवार, 16 जून 2026 को की गई। इस…

मुख्य तथ्य

भारत और जापान ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत संयुक्त क्रेडिट तंत्र (JCM) के कार्यान्वयन के नियमों को अंतिम रूप दे दिया है। यह घोषणा मंगलवार, 16 जून 2026 को की गई। इस तंत्र के तहत जापानी निवेश और प्रौद्योगिकी भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने या हटाने वाली परियोजनाओं को वित्तपोषित करेगी, और कार्बन क्रेडिट दोनों देशों के बीच साझा किए जा सकेंगे।

विस्तृत जानकारी

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि JCM के लिए सहयोग ज्ञापन (MoC) पिछले वर्ष हस्ताक्षरित किया गया था। कार्यान्वयन के नियम 8 जून 2026 को अपनाए गए, जो संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत हैं।

मंत्रालय के अनुसार, MoC ने शमन गतिविधियों पर सहयोग के लिए एक ढांचा स्थापित किया, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी या निष्कासन प्रदान करता है, साथ ही भारत में सतत विकास परिणामों का समर्थन करता है और दोनों देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) की प्राप्ति में योगदान देता है।

कार्यान्वयन के नियम

कार्यान्वयन के नियम मजबूत शासन व्यवस्था को परिभाषित करते हैं, जिसमें दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त समिति, पारदर्शी परियोजना अनुमोदन प्रक्रियाएं, तृतीय-पक्ष सत्यापन और साख, सतत विकास सुरक्षा उपाय, और क्रेडिट जारी करने और हस्तांतरण को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्री शामिल हैं।

प्रभाव और लाभ

सरकार ने कहा कि यह तंत्र निवेश आकर्षित करने, भारत में कम कार्बन प्रौद्योगिकियां लाने, तकनीकी क्षमता निर्माण करने और उत्सर्जन कम करने वाली परियोजनाओं का समर्थन करने में मदद करेगा, जबकि सतत विकास में योगदान देगा। मंत्रालय ने कहा, “संयुक्त क्रेडिट तंत्र जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। यह भारत में कम कार्बन प्रौद्योगिकियों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को उत्प्रेरित करेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन शमन और सतत विकास को समर्थन मिलेगा।”

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • JCM भारत और जापान के बीच एक द्विपक्षीय सहयोग है, जो पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 पर आधारित है।
  • इससे भारत में जापानी निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और अन्य कम कार्बन क्षेत्रों में।
  • कार्बन क्रेडिट साझा करने से दोनों देशों को अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • यह तंत्र भारत के सतत विकास लक्ष्यों में योगदान देगा और हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

संयुक्त क्रेडिट तंत्र (JCM) क्या है?

JCM पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत भारत और जापान के बीच एक द्विपक्षीय सहयोग है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी या निष्कासन के लिए परियोजनाओं को वित्तपोषित करने और कार्बन क्रेडिट साझा करने की अनुमति देता है।

JCM से भारत को क्या लाभ होगा?

इस तंत्र से जापानी निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत में कम कार्बन वाली परियोजनाओं को समर्थन मिलेगा और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

JCM के कार्यान्वयन के नियम कब अपनाए गए?

कार्यान्वयन के नियम 8 जून 2026 को अपनाए गए, जैसा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने घोषित किया।

क्या JCM के तहत कार्बन क्रेडिट का हस्तांतरण संभव है?

हां, दोनों देश अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कार्बन क्रेडिट साझा कर सकते हैं, जिससे पारस्परिक लाभ होगा।

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