मुख्य बातें
चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि भारत-चीन संबंध पिछले एक साल में 'रीसेट और ताजा शुरुआत' से 'विकास के नए स्तर' पर पहुंच गए हैं। उन्होंने संबंधों के पूर्ण सामान्यीकरण और भरोसे की कमी को दूर करने के लिए त्वरित प्रयासों का आह्वान किया।
विस्तार से
बेंगलुरु में 'द हिंदू हडल' कार्यक्रम में बोलते हुए राजदूत शू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, 'दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को बहुत महत्व देते हैं और उन्हें रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखते हैं।'
राजदूत ने कहा कि दोनों पक्षों ने हाल ही में ठोस प्रगति की है, जिसमें चीनी निवेश पर प्रतिबंधों में ढील, कैलाश-मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करना, और कई शहरों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली शामिल है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि संबंध अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
भरोसे की कमी
राजदूत ने कहा कि दोनों देशों के बीच 'भरोसे की गंभीर कमी' बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'नीति-निर्माण निकायों के बीच आदान-प्रदान पर्याप्त नहीं है। भारत और चीन के बीच लगभग 50 सरकारी संवाद तंत्र हैं, दुर्भाग्य से उनमें से अधिकांश ठप हैं।'
सीमा विवाद
गलवान घाटी संघर्ष के बाद सीमा मुद्दे पर, राजदूत ने कहा कि दोनों पक्षों ने हाल ही में कई दौर की बातचीत की है, जिसमें पिछले सप्ताह बीजिंग में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की 35वीं बैठक शामिल है। उन्होंने कहा, 'वर्तमान में सीमा की स्थिति आम तौर पर स्थिर और शांतिपूर्ण है।'
पाकिस्तान और ब्रिक्स
पाकिस्तान के साथ चीन के संबंधों पर, राजदूत ने कहा कि चीन चाहता है कि भारत और पाकिस्तान बातचीत और संवाद के जरिए अपने मतभेद सुलझाएं। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों का भी जिक्र किया, जिसकी मेजबानी भारत करेगा।
पाठकों के लिए महत्व
यह बयान भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत देता है, लेकिन भरोसे की कमी और सीमा विवाद जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ती बातचीत से व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- चीनी राजदूत ने भारत-चीन संबंधों को किस स्तर का बताया? राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि संबंध 'रीसेट और ताजा शुरुआत' से 'विकास के नए स्तर' पर पहुंच गए हैं, लेकिन पूर्ण सामान्यीकरण बाकी है।
- भारत-चीन संबंधों में किन मुद्दों पर प्रगति हुई है? चीनी निवेश पर प्रतिबंधों में ढील, कैलाश-मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू, और सीधी उड़ानों की बहाली जैसे कदम उठाए गए हैं।
- सीमा विवाद पर क्या स्थिति है? राजदूत ने कहा कि सीमा की स्थिति आम तौर पर स्थिर और शांतिपूर्ण है, और दोनों पक्ष बातचीत के जरिए हल निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- क्या शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे? राजदूत ने कहा कि चीन तैयारी कर रहा है, लेकिन अभी इस बारे में पक्का जवाब नहीं दे सकते।
स्रोत: www.thehindu.com