Desh Duniya | कावेरी डेल्टा

तमिलनाडु में हाइड्रोकार्बन कुओं के प्रस्ताव का किसानों और पर्यावरणविदों ने किया विरोध

मुख्य तथ्य हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड (HOEC) ने तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में परंगीपेट्टई तट से 18 किमी दूर चार हाइड्रोकार्बन कुएं खोदने का प्रस्ताव रखा है। ये कुएं तटीय नियामक क्षेत्र (CRZ-IVA) के…

मुख्य तथ्य

हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड (HOEC) ने तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में परंगीपेट्टई तट से 18 किमी दूर चार हाइड्रोकार्बन कुएं खोदने का प्रस्ताव रखा है। ये कुएं तटीय नियामक क्षेत्र (CRZ-IVA) के अंतर्गत आते हैं। प्रस्तावित स्थान पिचावरम रिजर्व फॉरेस्ट और परंगीपेट्टई के मैंग्रोव से मात्र 11.48 किमी की दूरी पर है, जिससे पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों में चिंता बढ़ गई है।

परियोजना का विवरण

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत बोलियां आमंत्रित की थीं। HOEC ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया है कि यह परियोजना कावेरी बेसिन के PY-1 क्षेत्र में उत्पादन में गिरावट की भरपाई के लिए है, बिना अनुमत उत्पादन स्तर को बढ़ाए। परियोजना की अनुमानित लागत ₹425 करोड़ है। आवेदन 1 जून को प्रस्तुत किया गया था और वर्तमान में तमिलनाडु तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण के विचाराधीन है। प्रत्येक कुएं की गहराई 3,000 मीटर तक होगी, जिसमें भूकंपीय सर्वेक्षण और भारी ड्रिलिंग उपकरण शामिल होंगे।

विरोध और चिंताएं

पूवुलागिन नानबार्गल के जी. सुंदरराजन ने कहा, "तटीय क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन कुएं खोदने से समुद्री जीवन को गंभीर खतरा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और पारिस्थितिकी तंत्र के विघटन से मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी। तमिलनाडु सरकार ने 2025 में तटीय हाइड्रोकार्बन परियोजनाओं का विरोध करने का रुख अपनाया था, उसे बनाए रखना चाहिए।"

पीएमके अध्यक्ष अनबुमणि रामदास ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बंगाल की खाड़ी में हाइड्रोकार्बन कुएं मछली भंडार और मैंग्रोव वनों को गंभीर नुकसान पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि पीएमके ने कावेरी डेल्टा क्षेत्र को संरक्षित कृषि क्षेत्र घोषित कराने में सफलता पाई थी, लेकिन HOEC इस सीमा से बाहर परियोजना को आगे बढ़ाना चाहता है, जो अस्वीकार्य है।

कावेरी डेल्टा किसान संघ के अध्यक्ष के.वी. एलांगीरन ने कहा कि तमिलनाडु संरक्षित कृषि क्षेत्र विकास अधिनियम, 2020 के तहत डेल्टा में ड्रिलिंग प्रतिबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र कावेरी डेल्टा को नष्ट करना चाहता है। उनके अनुसार, हाइड्रोकार्बन अन्वेषण से भूजल प्रभावित होगा और चिदंबरम, कट्टुमन्नारकोइल, कुमारची, कोल्लीडम और सिरकाझी के किसान खेती नहीं कर पाएंगे।

पर्यावरणीय प्रभाव

प्रस्तावित कुएं पिचावरम रिजर्व फॉरेस्ट और परंगीपेट्टई के मैंग्रोव से मात्र 11.48 किमी दूर हैं, जो वनस्पतियों और जीवों की कई प्रजातियों का घर हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि परियोजना लागू होने पर मैंग्रोव को खतरा होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाइड्रोकार्बन कुएं कहां प्रस्तावित हैं?

ये कुएं कुड्डालोर जिले के परंगीपेट्टई तट से 18 किमी दूर बंगाल की खाड़ी में प्रस्तावित हैं।

इस परियोजना का अनुमानित खर्च कितना है?

परियोजना की अनुमानित लागत ₹425 करोड़ है।

विरोध के मुख्य कारण क्या हैं?

पर्यावरणविदों और किसानों का कहना है कि इससे समुद्री जीवन, मैंग्रोव वन और भूजल को नुकसान पहुंचेगा, साथ ही मछुआरों और किसानों की आजीविका प्रभावित होगी।

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