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Kullu News: कनौन में महामाई आदि शक्ति के सम्मान में मनाया गया हूम पर्व, 70 फीट ऊंची मशाल से जगमगाया आस्था का उत्सव

कनौन में हूम पर्व: आस्था और परंपरा का अनूठा संगम कुल्लू जिले के कनौन गाँव में महामाई आदि शक्ति माता के सम्मान में हूम पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस देव…

कनौन में हूम पर्व: आस्था और परंपरा का अनूठा संगम

कुल्लू जिले के कनौन गाँव में महामाई आदि शक्ति माता के सम्मान में हूम पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस देव उत्सव में क्षेत्र और दूर-दराज से सैकड़ों श्रद्धालु एवं देवलू शामिल हुए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष अवसर पर माता अपनी दिव्य शक्ति के विशेष स्वरूप में प्रकट होकर पूरे क्षेत्र को सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यह पर्व क्षेत्र के सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।

देव परंपरा और मुख्य आकर्षण

देव परंपरा के अनुसार, महामाई आदि शक्ति माता कछैणी नामक स्थान पर स्थित देवालय से हारियानों और कारकूनों के साथ कनौन पहुँचीं। वहाँ देवता ब्रह्मा से देव मिलन की परंपरा का निर्वहन किया गया। इस पावन आयोजन का मुख्य आकर्षण माता के समक्ष 70 फीट लंबी मशाल का प्रज्वलन रहा। मान्यता है कि इस दिव्य ज्योति के माध्यम से माता अपनी शक्ति का प्राकट्य कर क्षेत्र की रक्षा, सुख-समृद्धि और लोक कल्याण का आशीर्वाद प्रदान करती हैं तथा बुरी शक्तियों को भगाती हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह

हूम पर्व में शामिल श्रद्धालुओं ने बड़ी आस्था और उत्साह के साथ इस देव उत्सव में भाग लिया। क्षेत्र के लोगों के लिए यह पर्व न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। माता के गूर रोशन ठाकुर ने बताया कि हूम क्षेत्र का अत्यंत प्राचीन देव पर्व है, जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को संजोए हुए है।

हूम पर्व का महत्व और प्रभाव

हूम पर्व स्थानीय समुदाय के लिए एकता और आस्था का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देता है। कुल्लू जिले की समृद्ध देव परंपरा को दर्शाने वाला यह उत्सव हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उदाहरण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हूम पर्व क्या है?

हूम पर्व कुल्लू जिले के कनौन में महामाई आदि शक्ति के सम्मान में मनाया जाने वाला एक प्राचीन देव उत्सव है, जिसमें 70 फीट ऊंची मशाल प्रज्वलित की जाती है।

हूम पर्व कहाँ मनाया जाता है?

यह पर्व हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कनौन गाँव में मनाया जाता है।

हूम पर्व का महत्व क्या है?

मान्यता है कि इस पर्व पर महामाई आदि शक्ति अपनी दिव्य शक्ति से प्रकट होकर क्षेत्र को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं तथा बुरी शक्तियों को दूर भगाती हैं।

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