मुख्य तथ्य
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जिन कर्मचारियों को 15 मई 2003 से पहले वर्कचार्ज स्टेटस मिला था, वे पुरानी पेंशन योजना के हकदार हैं, भले ही उनकी सेवाओं का नियमितीकरण इस तारीख के बाद हुआ हो। यह फैसला राज्य के हजारों कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।
फैसले का विवरण
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने वित्त विभाग के 13 मई 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को पुरानी पेंशन देने से इनकार किया गया था। अदालत ने राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 के तहत पेंशन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसे सभी सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करें।
याचिकाकर्ताओं का मामला
याचिकाकर्ताओं को वन विभाग में 1991 और 1993 में दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें 1 अप्रैल 2001 और 1 फरवरी 2003 से वर्कचार्ज स्टेटस दिया गया। 2007 में उनकी सेवाओं को नियमित किया गया। जब उन्होंने पुरानी पेंशन की मांग की, तो सरकार ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनका नियमितीकरण 15 मई 2003 के बाद हुआ है।
अदालत का तर्क
अदालत ने कहा कि पुरानी पेंशन के लिए पात्रता का निर्धारण वर्कचार्ज स्टेटस मिलने की तारीख से होता है, न कि नियमितीकरण की तारीख से। चूंकि याचिकाकर्ताओं को वर्कचार्ज स्टेटस 2001 और 2003 में मिल चुका था, जो कट-ऑफ तारीख से पहले है, इसलिए वे पुरानी पेंशन के हकदार हैं। अदालत ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया कि नियमितीकरण के बाद ही वे पूर्ण कर्मचारी बने।
प्रभाव
इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के उन सभी कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें 15 मई 2003 से पहले वर्कचार्ज स्टेटस मिला था, लेकिन बाद में नियमित किए गए। यह फैसला पुरानी पेंशन के दावों के लिए एक मिसाल कायम करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुरानी पेंशन के लिए कट-ऑफ तारीख क्या है?
हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना 15 मई 2003 को बंद हुई थी। इस तारीख से पहले वर्कचार्ज स्टेटस पाने वाले कर्मचारी पुरानी पेंशन के हकदार हैं।
क्या नियमितीकरण के बाद भी पुरानी पेंशन मिल सकती है?
हां, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वर्कचार्ज स्टेटस 15 मई 2003 से पहले मिला था, तो बाद में नियमितीकरण होने पर भी पुरानी पेंशन मिलेगी।
यह फैसला किन कर्मचारियों पर लागू होता है?
यह फैसला उन सभी कर्मचारियों पर लागू होता है जिन्हें 15 मई 2003 से पहले वर्कचार्ज का दर्जा मिला था, चाहे उनका नियमितीकरण बाद में हुआ हो।