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हिमाचल हाईकोर्ट का आदेश: होटल-रेस्टोरेंट मेन्यू और बिल पर बताएं कि पनीर असली है या नकली

मुख्य तथ्य हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में सभी होटलों, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी एग्रीगेटर्स को निर्देश दिया है कि वे अपने मेन्यू, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर स्पष्ट रूप से…

मुख्य तथ्य

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में सभी होटलों, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी एग्रीगेटर्स को निर्देश दिया है कि वे अपने मेन्यू, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर स्पष्ट रूप से बताएं कि वे असली डेयरी पनीर/चीज परोस रहे हैं या एनालॉग (वनस्पति तेल और स्टार्च से बना कृत्रिम पनीर)। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने डॉ. विनोद कुमार धवन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

आदेश का विवरण

अदालत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 और खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2011 के तहत सभी खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने उत्पादों की सही पहचान बताएं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कई होटल और रेस्टोरेंट बिना बताए एनालॉग पनीर का उपयोग कर रहे हैं, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और धार्मिक आस्थाओं को प्रभावित करता है। अदालत ने याचिका का निपटारा इस आश्वासन के साथ किया कि राज्य सरकार याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए टेस्टिंग के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी और एक स्वतंत्र व निष्पक्ष निर्णय लेगी।

सरकार का पूर्व कदम

सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि याचिकाकर्ता द्वारा 18 मई 2026 को कानूनी नोटिस देने के बाद, राज्य सरकार ने 24 जून 2026 को एक बड़ा कदम उठाया था। सरकार ने राज्य के सभी सहायक आयुक्तों (खाद्य सुरक्षा) को लिखित निर्देश जारी किए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सभी होटलों, फास्ट-फूड आउटलेट्स, कैटरर्स और ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों को 2011 के नियमों के तहत मेन्यू, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर सही जानकारी दर्शाने के कड़े निर्देश दें।

याचिकाकर्ता की आपत्ति

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि सरकार के निर्देशों में सैंपलिंग और टेस्टिंग (खाद्य पदार्थों की प्रयोगशाला में जांच) और उसके रिकॉर्ड को बनाए रखने का अहम हिस्सा छूट गया है, जो भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के नियमों के तहत अनिवार्य है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि वह राज्य सरकार के 24 जून के आदेश में रह गई इस कमी या अस्पष्टता को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक नया अभ्यावेदन दायर कर सकते हैं।

उपभोक्ताओं पर प्रभाव

यह आदेश उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब उन्हें यह जानने का अधिकार होगा कि वे जो पनीर या चीज खा रहे हैं, वह असली डेयरी उत्पाद है या कृत्रिम। इससे विशेषकर शाकाहारी और धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों को लाभ होगा, जो एनालॉग पनीर का सेवन नहीं करना चाहते। साथ ही, यह कदम खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगा और होटल व्यवसायियों को पारदर्शिता बरतने के लिए बाध्य करेगा।

आगे की प्रक्रिया

अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए टेस्टिंग के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी और एक स्वतंत्र व निष्पक्ष निर्णय लेगी। इस बीच, सभी खाद्य प्रतिष्ठानों को तुरंत प्रभाव से अपने मेन्यू, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर पनीर और चीज के प्रकार का उल्लेख करना अनिवार्य होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार होटलों को क्या करना होगा?

होटलों, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी एग्रीगेटर्स को अपने मेन्यू, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वे असली डेयरी पनीर/चीज दे रहे हैं या एनालॉग (वनस्पति तेल और स्टार्च से बना)।

यह आदेश किस याचिका पर आया?

यह आदेश डॉ. विनोद कुमार धवन द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया, जिसमें खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 और विनियम 2011 के प्रावधानों को लागू करने की मांग की गई थी।

सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाया?

24 जून 2026 को राज्य सरकार ने सभी सहायक आयुक्तों (खाद्य सुरक्षा) को निर्देश जारी किए कि वे होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों को मेन्यू, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर सही जानकारी दर्शाने के निर्देश दें। हालांकि, याचिकाकर्ता ने बताया कि इन निर्देशों में सैंपलिंग और टेस्टिंग का प्रावधान नहीं है।

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