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हिमाचल प्रदेश में दूध की बर्बादी का दर्दनाक मंजर: किसान ने 1200 लीटर दूध बहाया, पशुपालकों में फैला आक्रोश

हिमाचल प्रदेश में किसानों की दशा दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में, मंडी जिले के एक पशुपालक ने अपने 1200 लीटर दूध को सरकारी उपक्रम मिल्कफेड के चक्कर प्लांट के बाहर बहा…

हिमाचल प्रदेश में किसानों की दशा दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में, मंडी जिले के एक पशुपालक ने अपने 1200 लीटर दूध को सरकारी उपक्रम मिल्कफेड के चक्कर प्लांट के बाहर बहा दिया। यह घटना तब हुई जब बल्ह क्षेत्र की दुग्ध डेयरियों से शनिवार और रविवार को दूध की खरीद नहीं हुई।

किसानों का आक्रोश

इस घटना से पशुपालकों में भारी आक्रोश फैल गया है। उनका कहना है कि अगर दूध की खरीद नहीं होगी, तो वे अपने पशुओं को कैसे पालेंगे? उनकी आजीविका दूध बेचने पर ही निर्भर करती है। ऐसे में अगर दूध की खरीद नहीं होगी, तो उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी।

किसानों का आरोप है कि मिल्कफेड के अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। वे दूध की खरीद के लिए उचित व्यवस्था नहीं कर रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और दूध की खरीद के लिए उचित व्यवस्था करे।

दूध की खरीद की समस्या

हिमाचल प्रदेश में दूध की खरीद की समस्या एक पुरानी समस्या है। कई बार किसानों ने इस मामले में सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। किसानों का कहना है कि अगर दूध की खरीद नहीं होगी, तो वे अपने पशुओं को बेचने के लिए मजबूर होंगे। इससे उनकी आजीविका पूरी तरह से तबाह हो जाएगी।

सरकार की जवाबदेही

इस पूरे मामले में सरकार की जवाबदेही बहुत अधिक है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों की समस्या को समझे और दूध की खरीद के लिए उचित व्यवस्था करे। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उनके दूध का उचित मूल्य मिले। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो किसानों की दशा और खराब हो जाएगी।

English summary: A farmer in Himachal Pradesh's Mandi district has poured out around 1200 liters of milk in protest against the non-purchase of milk by the government-run Milkfed. The incident occurred after the dairy farms in the Balh area did not purchase milk on Saturday and Sunday. The farmers are angry and demanding that the government intervene and make proper arrangements for the purchase of milk.

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