मुख्य तथ्य
हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक ने राज्य भर में 241 सहकारी समितियों के निष्क्रिय सदस्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बैंक ने इन समितियों को नोटिस जारी कर कहा है कि जिन सदस्यों ने अपने शेयर मूल्य को 100 से 500 रुपये के बीच परिवर्तित नहीं किया है, उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी और उनके शेयर जब्त कर लिए जाएंगे।
कार्रवाई का विवरण
बैंक द्वारा भेजे गए नोटिस में सदस्यों को 30 सितंबर 2026 तक का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है। यदि इस तिथि तक सदस्य अपने शेयर मूल्य को निर्धारित सीमा में नहीं बदलवाते हैं, तो उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त मान ली जाएगी। इसके तहत कुल 63,822 शेयरों में जमा 63,82,200 रुपये की राशि बैंक के रिजर्व फंड में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
प्रभावित समितियां और जिले
यह कार्रवाई प्रदेश के कई जिलों की विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियों को प्रभावित करेगी। इनमें शिमला, मंडी, चंबा, सिरमौर, बिलासपुर और किन्नौर जिलों की कृषि, उपभोक्ता, विपणन, कर्मचारी और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियां शामिल हैं। सहायक रजिस्ट्रार की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कई समितियां वर्षों से निष्क्रिय हैं, कुछ का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, और कई बैंक के बार-बार के नोटिसों का जवाब भी नहीं दे रही हैं।
बैंक का उद्देश्य और सदस्यों के लिए सलाह
राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य सहकारी समितियों में वित्तीय पारदर्शिता और सक्रियता सुनिश्चित करना है। बैंक चाहता है कि केवल सक्रिय सदस्य ही समितियों का हिस्सा बनें, जिससे समितियों के वित्तीय स्वास्थ्य और संचालन क्षमता में सुधार हो सके। सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले अपने शेयर मूल्य को लेकर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर लें, अन्यथा उनकी सदस्यता और शेयर दोनों खत्म हो जाएंगे।
FAQ
किन समितियों के सदस्यों की सदस्यता समाप्त की जाएगी?
उन 241 सहकारी समितियों के सदस्य जिन्होंने अपने शेयर मूल्य को 100 से 500 रुपये के बीच परिवर्तित नहीं किया है।
सदस्यों को कार्रवाई से बचने के लिए क्या करना होगा?
30 सितंबर 2026 तक अपने शेयर मूल्य को निर्धारित सीमा में बदलवाना होगा और अपनी सदस्यता सक्रिय करनी होगी।
जब्त की गई राशि का क्या होगा?
63,822 शेयरों में जमा कुल 63,82,200 रुपये बैंक के रिजर्व फंड में जमा कर दिए जाएंगे।
यह कार्रवाई किन जिलों की समितियों पर लागू होगी?
शिमला, मंडी, चंबा, सिरमौर, बिलासपुर और किन्नौर जिलों की कृषि, उपभोक्ता, विपणन, कर्मचारी और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियां शामिल हैं।